लखनऊ। अब वह दिन दूर नहीं कि ब्लड के नमूने से अब लंग व अन्य कैंसर की जांच सम्भव हो सकेगी। इस शोध में अभी तक छह माइक्रोआरएनए की खोज लिया है। यह शोध किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के पल्मोनरी क्रिटकल केयर मेडिसिन विभाग व सेंटर फॉर एडवांस रिसर्च के तहत कि या जा रहा है। शोध कर रहे डा.वेद प्रकाश का दावा है कि यह शोध सफल होने पर कैं सर की पहचान के लिए एक लैंड मार्क साबित होगी। इस शोध की सफलता के बाद कैंसर की जांच के लिए लम्बी प्रक्रिया नहीं होगी। 24 घंटे में ही किस प्रकार का कैंसर है। इसकी पुष्टि हो जाएगी।
यह जानकारी शोध कर्ता डा. वेद प्रकाश व डा. सत्येन्द्र सिंह ने संयुक्त रूप से दी। उन्होंने बताया कि कैंसर की जांच के लिए अभी लम्बी प्रक्रिया होती है आैर यह प्रक्रिया कैंसर के प्रकार पर निर्भर करती है। डा. वेद ने बताया कि शोध में अस्सी संभावित कैंसर के मरीजों को शामिल किया गया। यह मेल व फीमेल दोनों शामिल हंै। इनमें लगभग 66 मरीजों में लगभग कैंसर की पुष्टि हो चुकी है। उन्होंने बताया कि मरीज के खून व ब्राांक्रोस्कोपी से लिए गये ऊतक को बायोप्सी जांच व मालीक्यूूलर लैब में भेजा जाता है। वरिष्ठ डा.सत्येन्द्र ने बताया कि ऊतक की जांच से माइक्रोआरएनए पर शोध किया जा रहा है। यह इतने सूक्ष्म होते है कि खून में आसानी से विलय रहते है।
उन्होंने बताया कि लगातार शोध के बाद छह महत्वपूर्ण माइक्रोआरएनए की पहचान की गयी है। शोध में चिह्नित यह माइक्रोआरएनए कैंसर की पहचान के लिए महत्वपूर्ण माने जा रहे है। लगातार उच्चस्तरीय शोध चल रही है। इन छह माइक्रोआरएनए से कैंसर की पहचान के महत्वपूर्ण होंगे। इन माइक्रोआरएनए में अलग- अलग पहचान कर कैंसर कहां है यह भी शुरुआती दौर में बता दिया जाएगा।
डा. वेद ने बताया कि अभी तक लंग कैंसर हो या अन्य कोई कैंसर हमेशा देर से ही आते है, लेकिन यह शोध सफल हो जाने के बाद खून से ही पता चल कैंसर का पता चल जाएगा। उन्होंने बताया कि छह माइक्रोआरएनए किस कैंसर के कारक है। इसकी पहचान भी लगभग छह महीने में ही किये जाने की संभावना है।
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