लखनऊ। किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के प्लाज्मा बैंक में प्लाज्मा यूनिट समाप्त हो रहा है। यहां ब्लड ट्रांस फ्यूजन विभाग के तहत चलने वाला यह बैंक प्रदेश के सबसे बड़ा प्लाज्मा बैंक है। कोरोना की दूसरी लहर में यहां से जीवन बचाने के लिए दिल्ली, प्रयागराज, कानपुर सहित प्लाज्मा यूनिट ले जा चुके है। डा. तूलिका ने कोरोना संक्रमण से ठीक हो चुके लोगों से प्लाज्मा डोनेशन की लगातार अपील की है।
प्लाज्मा बैंक की प्रभारी डा. तूलिका चंद्रा का कहना है कि प्रदेश के सबसे बड़े प्लाज्मा बैंक में लोग कोरोना संक्रमण से ठीक होने के बाद प्लाज्मा डोनेशन करने आ रहे थे। इसके अलावा जिस कोरोना संक्रमण के जिस मरीज को प्लाज्मा चाहिए होता था, उसे भी डोनर भी लेकर आना होता था, उन्होंने बताया कि काफी लोग डोनर लेकर आये, लेकिन दूसरी लहर में केजीएमयू में कई मरीजों की जिंदगी बचाने के लिए प्लाज्मा तो दे दिया गया, परन्तु डोनर नही आया। इसके अलावा प्लाज्मा डोनर नहीं आ रहे है। ऐसे में प्लाज्मा बैंक में अब मात्र 18 यूनिट ही प्लाज्मा बचा है। लगातार लोगों से अपील की जा रही है, जो कि कोरोना संक्रमण से ठीक हो चुका है। वह निर्धारित मानकों के बाद प्लाज्मा डोनेशन कर सकता है। उन्होंने बताया कि सरकार अस्पतालों की तो मदद की जा रही है, लेकिन निजी क्षेत्र के अस्पतालों से प्रति प्लाज्मा यूनिट आठ हजार शुल्क लिया जा रहा है।
डा. तूलिका ने बताया कि पहले तो कोरोना बीमारी से ठीक हो चुका मरीज बिना वैक्सीनेशन कराये ही प्लाज्मा डोनेशन कर सकता था, लेकिन अब कोरोना का मरीज ठीक होने के बाद वैक्सीनेशन करा भी चुका है तो भी वह 28 दिन बाद प्लाज्मा डोनेशन कर सकता है। कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर में प्लाज्मा बैंक से 150 प्लाज्मा जा चुके है। इनमें काफी संख्या में प्लाज्मा थेरेपी के लिए प्रयोग किया गया है। प्लाज्मा थेरेपी कोरोना संक्रमण से गंभीर मरीजों के लिए वरदान साबित हो रही है। इसके अलावा गैर राज्यों या जनपदों में प्लाज्मा अगर पांच से सात घंटें में पहुंच जाता है, तो आइस बाक्स में प्लाज्मा दे दिया जाता है। उन्होंने बताया कि कोरोना के गंभीर मरीज के लिए केजीएमयू प्लाज्मा बैंक से उनकी मैचिंग ग्रुप का प्लाज्मा लोग आकर ले जा चुके है। इसके अलावा अन्य जनपदों से भी मांग लगातार आ रही है।












