लखनऊ। यूपी प्रेस क्लब में आयोजित प्रेस वार्ता में जय क्लीनिक एण्ड डायबिटीज केयर सेन्टर के निदेशक डा. एके तिवारी ने इंटरनेशनल डायबिटीज फेडरेशन आैर डायबिटीज एवं रमादान संगठन की गाइड लाइन के अनुसार मधुमेह रोगियों को उनके जोखिम के अनुसार निम्न श्रेणियों में रखा है। टाइप वन डायबिटीज के रोगियों का बहुत अधिक सावधानी रखने की जरूरत है। नियंत्रित टाइप-2 डायबिटीज रोगी को सावधानी पूर्वक रोजा रखना चाहिए।
हाइपोग्लाइसीमिया की स्थिति में जान बचाने के लिए चार चम्मच चीनी या ग्लूकोस एक ग्लास पानी में तुरन्त ले। ऐसे में रोजा जारी रखना ठीक नहीं। पसीना आना, धुधला दिखायी देना, अत्यधिक भूख लगना, बेहोशी आना, थरथराहट, सर में हल्कापन दर्द आैर दिल तेजी से धड़कना। यह लक्षण हाइपोग्लाइसीमिया के हैं। उन्होंने कहा कि समय-समय पर शुगर करे खासतौर पर रमजान के पहले हफ्त में। सहरी से पहले देर दोपहर अफ्तार के बाद शुगर अवश्य टेस्ट करें। सहरी खाना सुन्नते रसूल है। रमजान में शुगर के मरीजों के खान-पान के बारे में भी जानकारी देते हुए बताया कि खान-पान का संतुलित होना बहुत अहम है। खाना हल्का सुपाच्य एवं ताजा होना चाहिए।
उन्होंने बताया कि उपवास का समय करीब 15 घंटे से अधिक है आैर आज-कल का तापमान 40 डिग्री से अधिक है, इसलिए अधिक सतर्क रखने की जरूरत है। चाय, काफी, तम्बाकू के सेवन से परहेज करें। कम से कम 8 से 10 ग्लास पानी व अन्य तरल पदार्थ लें। भोज्य पदार्थ जैसे जौ की दलिया, सब्जियां, दाले, छोला अौर राजमा आदि सर्वोत्तम है। साथ ही तरल पदार्थों में मट्ठा, नारियल पानी, नमकीन, नीबू पानी आैर सत्तू आदि लेते रहें। न्यूटीशनिस्ट अमरीन कुरैशी ने बताया कि अत्याधिक तले भुना भोजन गरिष्ठ भोजन से परहेज करें।











