डेस्क। संसद की एक समिति की रिपोर्ट में भारत में विशेषज्ञ डाक्टरों की भारी कमी पर चिंता व्यक्त की है। यह कमी खासकर हृदय रोग, पुराने किडनी रोग, मधुमेह, क्र ोनिक ऑब्सट्रक्टिक पल्मीनरी डिसऑर्डर से जुड़े डाक्टरों की है, जो रोग लोगों की मौत के प्रमुख कारणों में गिने जाते हैं ।
लोकसभा में प्रस्तुत स्वास्थ्य आैर परिवार कल्याण मंत्रालय की प्राक्कलन समिति की रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में हृदय रोग, पुराने किडनी रोग, मधुमेह, क्र ोनिक ऑब्सट्रक्टिक पल्मीनरी डिसऑर्डर जैसी दस बीमारियों के विशेषज्ञों की काफी कमी है। ये ऐसे रोग हैं जिनका इलाज कोई एमबीबीएस डिग्रीधारी चिकित्सक नहीं कर सकता।
समिति ने पाया कि भारत में हृदय रोग के चार हजार चिकित्सक हैं जबकि इनकी संख्या 88 हजार होनी चाहिए। इसी तरह मधुमेह विशेषज्ञों की संख्या महज 650 है जबकि 27 हजार 900 विशेषज्ञ मधुमेह चिकित्सकों की देश को जरूरत है।
समिति ने पाया कि देश में पुराने किडनी रोग का इलाज करने के लिए महज 1200 नेफ्र ोलॉजिस्ट हैं, जबकि देश में 40 हजार नेफ्र ोलॉजिस्ट की आवश्यकता है।
इतना ही नहीं, हृदय रोग के लिए मेडिकल कॉलेजों में जहां 315 पीजी सीट हैं वहीं इसके लिए 3375 पीजी सीट की दरकार है। इसी तरह नेफ्र ोलॉजी के लिए पीजी में 120 सीट है जबकि 2150 सीट की आवश्यकता है।











