कानपुर। देश के उप राष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने आज कहा कि स्कूल पाठयक्र म में कृषि आैर संस्कृति विषय होने चाहिए।
नायडू ने यहां चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं तकनीकी विश्वविद्यालय के 19वें दीक्षांत समारोह में कहा कि कृषि आैर संस्कृति दोनों को स्कूल के पाठयक्र म में होना चाहिए। इसके लिए वह जल्द मंत्रियों आैर अन्य संबंधित लोगों से बात करेंगे।
उन्होंने कहा कि कृषि को कैसे लाभदायक बनाया जाए, इसकी जिम्मेदारी कृषि विश्वविद्यालयों, कृषि विज्ञान केंद्रों (केवीके) आैर वैज्ञानिकों की है।
मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुए उप राष्ट्रपति ने कहा, हमें अपनी मातृभाषा आैर मातृभूमि को कभी नहीं भूलना चाहिए। हमारे देश का इतिहास पांच हजार साल से भी ज्यादा पुराना है। मैं अंग्रेजी के विरद्ध नहीं हूं, लेकिन यदि हम अपनी मातृभाषा में बात करें तो ज्यादा अच्छा रहेगा। नायडू ने कहा कि मातृभाषा हर एक को सीखना चाहिए। घर में हर एक को मातृभाषा में ही बात करनी चाहिए। साथ ही हमें अपने पूर्वजों को भी नहीं भूलना चाहिए। जिस तरह से मां शब्द उच्चारण में अंदर से निकलकर आता है उसी तरह अम्मी शब्द भी अंदर से निकलता है।
छात्रों से उप राष्ट्रपति ने कहा कि हमें भारतीय भाषाओं को प्रोत्साहन देना चाहिए। साथ ही प्रत्येक देशवासी को अपनी मातृभाषा से इतर एक अन्य क्षेत्रीय भाषा को भी सीखने का प्रयत्न करना चाहिए। नायडू ने उदाहरण दिया, रूस, चीन, फ्र ांस आैर बेलारूस देशों के प्रमुख जब भारत आते हैं तो ज़्यादातर अपनी मातृभाषा में ही बात करते हैं। इसका मतलब ये नहीं है कि उन्हें अंग्रेजी नहीं आती बल्कि वे अपनी मातृभाषा का सम्मान करते हैं।
नायडू ने कहा कि जीवन में शिक्षक का स्थान बहुत महत्वपूर्ण है। आजकल के बच्चे सिर्फ गूगल करते हैं। गूगल जानकारी प्राप्त करने का अच्छा तरीका है, लेकिन गूगल कभी शिक्षक की जगह नहीं ले सकता। कृषि क्षेत्र की चुनौतियों पर उन्होंने कहा कि जिस दर से देश की आबादी बढ़ रही है, हमें उसी दर से खाद्यान्न का उत्पादन भी करना होगा। ऐसा तभी संभव होगा जब कृषि एक लाभदायक व्यवसाय बनकर उभरे। इसकी जिम्मेदारी राजनेताओं आैर वैज्ञानिकों दोनों पर है। हम विदेश से बेहतर केचप आैर चिप्स बना सकते हैं।
उन्होंने कहा कि कृषि बेहतर व्यवसाय तभी बन सकता है जब बैंक ये दायित्व समझें कि उन्हें किसानों को सस्ता ऋण उपलब्ध कराना है। इसी प्रकार कृषि विश्वविद्यालयों आैर केवीके का यह दायित्व हो कि वे रोग प्रतिरोधक बीज अच्छी तदाद में किसानों को उपलब्ध कराएं। नायडू ने वैज्ञानिकों का आह्वान किया कि कृषि की आधुनिकतम तकनीक को प्रयोगशाला से जमीन तक पहुंचाएं।
दीक्षांत समारोह में कुल 424 विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान की गर्इं जिनमें से 28 विद्यार्थियों को विभिन्न विषयों में पीएचडी की उपाधि दी गयी। उत्कृष्ट प्रदर्शन के आधार पर सात विद्यार्थियों को कुलाधिपति स्वर्ण पदक, सात को विश्वविद्यालय रजत पदक, सात छात्रों को विश्वविद्यालय कांस्य पदक एवं 10 विद्यार्थियों को प्रायोजित स्वर्ण पदकों से सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम में राज्यपाल राम नाईक ने कृषि वैज्ञानिक डॉ एनएस राठौर व प्रो. एमपी पांडेय को डॉक्टर ऑफ साइंस मानद उपाधि से अलंकरण का प्रशस्ति पत्र प्रदान किया।