लखनऊ। ऐसे समय में जब पूरा विश्व कोरोना वायरस के संक्रमण से गुजर रहा है, एक और वायरस बड़ी तेजी से फैलता जा रहा है। यह वायरस है फेक न्यूज का और कोरोना वायरस के संवाहक की तरह ही हम और आप इस वायरस को फैला रहे हैं। ख्व़ाजा मोईनुद्दीन चिश्ती भाषा विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग द्वारा आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय वेबीनार (वेब सेमिनार) में यह बातें डॉ. मुकुल श्रीवास्तव ने कही।
गूगल जी-सूट आनलाइन प्लेटफॉर्म पर आयोजित दो दिवसीय वेबीनार में कार्यशाला का संचालन कर रहे पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग, लखनऊ विश्वविद्यालय के अध्यक्ष डॉ. मुकुल श्रीवास्तव ने कहा कि जाने अनजाने में हम सब सोशल मीडिया पर ऐसे संदेश फारवर्ड करते रहते हैं, जिनका वास्तविक से कोई संबंध नहीं होता। वर्तमान समय में तो कोरोना संबंधित फेक न्यूज की बाढ़ सी आई है, हमें इनसे बचना चाहिए। डॉ. श्रीवास्तव ने फेक संदेशों को जांचने की कई विधियां भी प्रतिभागियों को समझाई। वेबीनार के पहले दिन जहां सुप्रसिद्ध टेलीविजन कार्यक्रम सुरभि के प्रस्तुतकर्ता सिद्धार्थ काक ने बदलती टीवी तकनीक पर बात की, वहीं माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय की प्रो. पी. शशिकला ने कोविड-19 से संबंधित शोध कार्यों पर प्रकाश डाला।
मनोविज्ञानी डॉ. आराधना गुप्ता ने इस दौरान होने वाले मनोविकारों एवं उनके उपायों पर चर्चा की। कार्यक्रम के अंतिम सत्र में यूनीसेफ की सोशल पाॅलिसी स्पेशलिस्ट एवं मुख्य अतिथि पियूष एंटोनी ने कोविड-19 के सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियों पर बात रखी। उन्होंने श्रमिकों को ‘प्रवासी’ कहे जाने पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि देश में रहते हुए भी वह किस तरह प्रवासी या विस्थापित हो सकते हैं। साथ ही उन्होंने लैंगिक समानता पर भी बात रखी।
वेबीनार की अध्यक्षता विवि के कुलपति प्रो. माहरुख मिर्ज़ा ने की। कार्यक्रम में देश के सभी प्रमुख विश्वविद्यालयों के शिक्षकों एवं विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया। दो दिवसीय वेबीनार की संक्षेपिका डॉ. तनु डंग ने प्रस्तुत की। कार्यक्रम की आयोजन एवं संचालिका पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग की शिक्षिका डॉ. रुचिता सुजाॅय चौधरी ने सभी विशेषज्ञों एवं प्रतिभागियों को धन्यवाद ज्ञापित किया।
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