लखनऊ। किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय की इमरजेंसी ट्रामा सेंटर के डाक्टरों ने बच्चे के हाथ में कंधे के समीप आर-पार धंसे भाले को जटिल सर्जरी कर निकाल दिया। भाले की लंबाई अधिक होने के साथ ही वह बच्चे के हाथ में ऐसा धंस कर दूसरी ओर निकल गया था। इस कारण उसे लिटा कर सर्जरी करने के साथ ही एनेस्थिसिया देकर सर्जरी करना बेहद जटिल था,फिर भी
उन्नाव का रहने वाला अनिकेत 13 वर्ष सोमवार दोपहर में एक बजे छप्पर को ठीक कर रहा था। इस बीच उसका संतुलन बिगड़ने पर वह छप्पर से नीचे आ गिरा। बताते है कि छप्पर के किनारे लोहे का भाला खड़ा रखा था, जोकि पल भर में उसके दाहिने हाथ के बाजू को चीरता हुआ आर-पार धंस गया। हाथ से तेज खून बहने लगा आैर उसके कपड़े खून से सन गये। पिता नंदराम सिंह बच्चे को लेकर स्थानीय अस्पताल पहंुचे। यहां डॉक्टरों ने बच्चे की हालत देखने पर तत्काल केजीएमयू के ट्रॉमा सेंटर ले जाने की सलाह दी।
भाला हाथ में धंसा होने के कारण बच्चे को तेज दर्द से कराहते हुए वह रो रहा था। खुन बहने के कारण परिजन बेहाल हो रहे थे, फिर बच्चे को दिलासा देते हुए चुप करा रहे थे। आनन-फानन वह लोग बच्चे को लेकर करीब साढ़े तीन बजे केजीएमयू के इमरजेंसी ट्रॉमा सेंटर पहुंचे। यह पर ट्रॉमा सर्जरी विभाग के वरिष्ठ डॉ. समीर मिश्र ने बच्चे की कोविड प्रोटोकॉल के तहत जांच करायी। इस दौरान सिर्फ कोरोना की रिपोर्ट आने में वक्त लगा। इस बीच डा. समीर के नेतृत्व में डाक्टरों की टीम ने बच्चे की जान बचाने का फैसला कर लिया था। डॉ. समीर मिश्र के साथ डॉ. नरेंद्र, डॉ. यादवेंद्र और डॉ. वैभव ऑपरेशन टीम में शामिल थे। इमरजेंसी सर्जरी शुरू की गयी आैर लगभग एक घंटे तक सर्जरी चली। डॉ. समीर मिश्र ने बताया कि भाला लंबा होने के साथ ही चोट भी ऐसी जगह थी, जिससे बच्चे को लिटाकर एनेस्थीसिया देना कठिन काम था। उन्होंने बताया कि अगर भाले की बांस काटते तो घाव बढ़ रहा था। टीम ने किसी प्रकार उसे लिटाकर बेहोशी दी। उन्होंने बताया कि धमनी से खून का रिसाव होने लगा था। मांसपेसियों आैर नसें भी क्षतिग्रस्त थीं। जिसको ठीक करते हुए मशीन से खून के बहाव को मापा गया आैर बच्चे का सर्जरी सफल हो गयी।












