लखनऊ। ग्यारह महीने का बच्चा के सिर का आकार सामान्य से दोगुना हो गया था और यह स्थिति लगातार खराब होती जा रही थी। माता-पिता बच्चे के इलाज के लिए कई अस्पताल भटकने के बाद डॉक्टर के परामर्श पर किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय पहुंचे, जहां पीडियाट्रिक सर्जरी के विशेषज्ञ डॉक्टरों ने सर्जरी कर बच्चे को परेशानी से निजात दिलायी।
विभाग प्रमुख डा जे डी रावत ने बताया कि जेल रोड निवासी विकास महतो के पुत्र को जन्म से ही सिर में पानी (Hydrocephalus) की गंभीर समस्या थी। सिर में पानी भर जाने के कारण उसका सिर सामान्य से काफी बढ़ा हो गया था।पीडियाट्रिक सर्जरी के विभागाध्यक्ष प्रो. जे.डी. रावत ने बताया कि सामान्यत: 11 माह के बच्चे के सिर का आकार 43 से 47 सेंटीमीटर होता है, लेकिन बच्चे के सिर
का आकार बढक़र लगभग 84 सेंटीमीटर हो चुका था। परिजनों के अनुसार गर्भावस्था के आठवें महीने में ही डाक्टरों ने उन्हें बता दिया था कि बच्चे के सिर में पानी भर गया। यही वजह थी कि जन्म के बाद बच्चे को संक्रमण हो गया और उसे दो माह आईसीयू में रखना पड़ा था।
डाक्टरों ने पूर्व में यह भी कहा था कि इलाज करना होगा मगर परिजन निजी कारणों से समय पर इलाज नहीं करा सके। यही वजह है कि बीमारी गंभीर होती चली गई। समय पर इलाज न मिलने के कारण बच्चे का सिर असामान्य रूप से बढ़ गया। सिर का आकार तेजी से बढऩे के कारण आंखे भीतर की ओर घंस गई जिससे आंखों से संबंधित समस्याएं भी शुरू हो गईं। बच्चे की हालत गंभीर होने पर घबराए परिजन उसे पहले झलकारीबाई महिला चिकित्सालय ले गए। वहां डाक्टरों ने उसे देखा और केजीएमयू रेफर कर दिया। केजीएमयू आने पर आने बच्चे को बीती 5 जनवरी को पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग में भर्ती कर इलाज शुरू कर दिया गया। प्रो. रावत के नेतृत्व में शुक्रवार को चिकित्सकों की टीम ने बच्चे की सर्जरी की।
डा. रावत ने बताया कि सर्जरी के बाद बच्चे के सिर में जमा पानी कम हो रहा है। बच्चा पूरी तरह से स्वस्थ है और उसकी हालत में तेजी से सुधार हो रहा है। प्रो. रावत ने कहा कि एक दो दिन में वह सामान्य रूप से भोजन करने लगेगा। ऑपरेशन करने वाले टीम में प्रो. जे.डी. रावत के साथ डॉ. प्रीति कुमारी, एनेस्थेटिस्ट डॉ. आयुषी बग्गा तथा नर्सिंग स्टाफ संजय एवं संतोष शामिल रहे।












