लखनऊ। किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय में कैल्शियम की दवा के नाम पर मरीजों को खड़िया बांटे जाने मामले में शुक्रवार को जांच कमेटी ने अपनी रिपोर्ट दवा कम्पनी को क्लीन चिट दे दी है। जांच कमेटी ने जांच रिपोर्ट को कुलपति को सौंप दी है। इस जांच रिपोर्ट ने एक तीर से दो शिकार कर दिये है। दवा को ठीक बताया है आैर इस बहाने दवा कम्पनी की रिपोर्ट भी सही हो गयी है। कमेटी ने रिपोर्ट में दवा के रखरखाव में गड़बड़ी की वजह खराब होने की दावा किया है। इसके बाद अब इंडोक्राइन सर्जरी विभाग के स्टोर इंचार्ज पर रखरखाव में लापरवाही का ठीकरा फूट गया है। कुलपति का कहना है रिपोर्ट मिल गई है, जिसमें दवा में कोई गड़बड़ी नहीं मिली है। उसमें ऐसा कुछ नही है जो कि मरीजों के लिए हानिकारक हो।
बताते चले कि केजीएमयू के ही इंडोक्राइन सर्जरी विभाग के एक डॉक्टर ने केजीएमयू डॉक्टर्स ग्रुप पर बीती दस अप्रैल को कैल्शियम की दवा को खड़िया बताते हुए दवा का फोटो वायरल कर दिया। इससे केजीएमयू प्रशासन में हड़कम्प मचा आैर डाक्टर से लिखित शिकायत ले ली गयी। इसके बाद दवा की जांच के लिए कमेटी गठित की गई थी। कमेटी में ट्रॉमा सीएमएस डॉ. यूबी मिश्रा के नेतृत्व में चार सदस्यीय कमेटी बना दी गयी। शुक्रवार को कमेटी ने अपनी जांच रिपोर्ट कुलपति को सौंप दी। जांच रिपोर्ट में दवा की गुणवत्ता पर कोई सवाल नहीं उठाया गया है।
बल्कि रखरखाव की कमी में नमी की वजह से दवा बेकार होने की बात कही गई। इससे अब दवा कंपनी को भी क्लीन चिट मिल गयी है। मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. एसएन शंखवार ने बताया कि दवा की गुणवत्ता ठीक मिली है मगर दवा का रखरखाव ठीक न होने से खराब हो गई थी। अब यह बात कही जा रही है कि पुराने बैच की दवा इंडोक्राइन सर्जरी विभाग के स्टोर इंचार्ज दबाए बैठे थे। जब यह दवा वितरण की गयी तो रखरखाव में कमी से लापरवाही के कारण नमी आ गयी थी।
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