सर्जिकल आंकोलॉजी विभाग की कैंसर मरीजों के लिए नयी शुरुआत
लखनऊ। कैंसर जैसी जटिल बीमारी के खिलाफ संघर्ष केवल दवाओं से ही नहीं, बल्कि मजबूत इरादों से भी जीता जाता है। इसी जज्बे को अमली जामा पहनाने के लिए किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के सर्जिकल आंकोलॉजी विभाग ने एक अनोखी शुरुआत की है।
शनिवार को विभाग ने कैंसर सर्वाइवर प्रोग्राम की शुरू किया गया, जिसका मकसद इलाज करा चुके कैंसर विजेताओं के अनुभवों के माध्यम नए मरीजों को मानसिक मजबूती पैदा करते हुए हौसलों को उड़ान देनी है।
शताब्दी भवन स्थित सर्जिकल आंकोलॉजी विभाग में आयोजित कार्यक्रम में विभागाध्यक्ष डॉ. विजय कुमार, डॉ. संजीव मिश्र, डॉ. नसीम अख्तर और डॉ. समीर गुप्ता समेत अन्य डॉक्टर व अन्य सहयोगी साथी उपस्थित रहे। कार्यक्रम में विभाग प्रमुख डॉ. विजय कुमार ने बताया कि इस कार्यक्रम के तहत कैंसर को हरा दे चुके मरीज अब नए मरीजों की काउंसलिंग करके प्रेरणा स्रोत बनेंगे। वह अपने संघर्ष और जीत की कहानी साझा करेंगे, जिससे इलाज करा रहे मरीजों को उम्मीद और साहस मिलेगा।
डॉ. नसीम अख्तर ने बताया कि कैंसर विजेता सामाजिक सरोकार के तहत मरीजों की सेवा करेंगे। इसके लिए सप्ताह में दो दिन गुरुवार और शुक्रवार को शाम तीन बजे वे अस्पताल आएंगे और मरीजों व उनके तीमारदारों की उलझनों को दूर करेंगे। विभाग में इसके लिए एक अलग कमरा भी निर्धारित किया गया है, जहां कैंसर विजेता मरीजों से संवाद कायम करेंगे।
मरीजों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए विभाग में जगह-जगह क्यूआर कोड भी लगाए गए हैं। मरीज और उनके परिजन मोबाइल से क्यूआर कोड स्कैन कर अप्वाइंटमेंट ले सकते हैं। निर्धारित समय पर वे कैंसर विजेताओं से मिलकर बीमारी, इलाज और उससे जुड़े अनुभवों के बारे में विस्तार से जान सकेंगे।
डॉ. नसीम ने बताया कि बड़ी आंत, मुंह, पेट, जीभ समेत शरीर के कई अंगों के कैंसर का इलाज सर्जरी, दवा और रेडियोथेरेपी के माध्यम से किया जाता है। बीमारी की स्टेज के अनुसार इलाज की दिशा तय होती है। कुछ मरीजों को केवल सर्जरी की जरूरत होती है, जबकि कई को सर्जरी के साथ दवाएं या तीनों तरह की चिकित्सा लेनी पड़ती है।
इलाज पूरा कर चुके मरीज इन परेशानियों को सबसे बेहतर तरीके से समझते हैं, क्योंकि वे खुद इस दौर से गुजर चुके होते हैं। ऐसे में वे नए मरीजों के मन में उठने वाले सवालों का जवाब अधिक संवेदनशीलता के साथ दे सकते हैं। डॉ. नसीम ने बताया कि डॉक्टरों के पास समय की कमी रहती है, लेकिन कैंसर विजेता मरीजों की विस्तार से काउंसलिंग कर उनका हौसला बढ़ा सकते हैं। यही पहल अब कैंसर के खिलाफ जंग को और मजबूत बनाएगी।












