Kgmu में बायो सेफ्टी लेवल -4 लैब देश की दूसरी लैब

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लखनऊ। किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय में बायो सेफ्टी लेवल -4 लैब की स्थापना का लक्ष्य रखा गया है, जबकि पीजीआई में अत्याधुनिक बायो सेफ्टी लेवल -3 लैब का निर्माण होगा। प्रदेश में केजीएमयू की यह अत्याधुनिक बायो सेफ्टी लेवल -4 लैब पुणे स्थित वायरोलॉजिकल लैब के बाद देश की दूसरी लैब होगी। विशेषज्ञों के मुताबिक इस लैब की मदद से वायरस पर शोध करने के साथ ही वैक्सीन पर भी शोध किया जा सकेगा। पीजीआई में बनने वाली अत्याधुनिक बायो सेफ्टी लेवल -3 लैब में वायरोलॉजिकल डिजीज पर शोध होगा, लेकिन यह लैब वर्तमान में केजीएमयू के पास है। पीजीआई में राष्ट्रीय स्तर का मधुमेह सेंटर बनने जा रहा है।
पीजीआई को इस बार लगभग नौ सौ करोड़ की बजट दिया गया है। इसमे प्रमुख रूप से बायो सेफ्टी लेवल -3 की स्थापना करना है। निदेशक प्रो. आर के धीमान का कहना है कि इस लैब के स्थापना होने के बाद विभिन्न गंभीर बीमारियों की जांच के लिए दूसरे सेंटरोें पर निर्भर नही रहना होगा। इसी के साथ ही इंफेक्शन डिजीज सेंटर के बीमारियों पर शोध किया जा सकेगा। बताते चले कि पीजीआई में हेपेटोलॉजी विभाग की शुरूआत भी हो गयी है आैर लिवर से जुड़ी जटिल बीमारियों का इलाज भी शुरू हो गया है। इसके अलावा पीजीआई में शासन ने राष्ट्रीय स्तर का मधुमेह सेंटर बनाने की घोषणा कर स्थापित करना प्रदेश सरकार की प्राथमिकता में है। इसके शुरु होने से मधुमेह के मरीजों को इलाज में उच्चस्तरीय सुविधा मुहैया करायी जा सकेगी। यह सेंटर नवीन ओपीडी के सामने बनेगा। 18 महीने में काम पूरा हो जाएगा। इसमें ओपीडी ,वार्ड के अलावा आईसीयू की सुविधा होगी। यहां पर डायबिटीज के अलावा आंख व गुर्दे का इलाज भी मरीजों का आसानी से मिल सकेगा।
उधर किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय में भी अत्याधुनिक बायो सेफ्टी लेवल -4 लैब की स्थापना किये जाने की हरी झंडी मिलने के साथ ही यहां पर भी शोध कार्यो के अलावा निपाह, जीका, मीका सहित अन्य जटिल बीमारिंेयों की जांच की जा सकेगी, प्रदेश में केजीएमयू में अत्याधुनिक बायो सेफ्टी लेवल -4 लैब की स्थापना होने के बाद प्रदेश किसी भी विश्व व्यापी बीमारियों की जांच के अलावा शोध करने में भी अग्रणी भूमिका निभायेंगा। विशेषज्ञों की माने तो पुणे स्थित वायरोलॉजिकल लैब के बाद केजीएमयू में बायो सेफ्टी लेवल -4 लैब देश की दूसरी लैब होगी। जहंा पर सभी प्रकार वायरस की पहचान के लिए शोध किया जा सकेगा। केजीएमयू के ट्रामा सर्जरी विभाग के प्रमुख व इमरजेंसी ट्रामा सेटर के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डा. संदीप तिवारी का कहना है कि लखनऊ चिकित्सा हब बनता जा रहा है। अभी ही राजधानी ही नही आस-पास के राज्यों के मरीज आकर इलाज व सर्जरी करा रहे है। जल्द ही मरीजों का दिल्ली व मुम्बई न जाकर लखनऊ में ही जटिल बीमारियों का इलाज सम्भव हो सकेगा। इससे प्रदेश सरकार की आय भी बढ़ेगी। उनका कहना है कि राजधानी में उच्चस्तरीय चिकित्सा सुविधा मिलने से प्रदेश सरकार की आय भी बढ़ेगी। उन्होंने बताया कि यहां पर चिकित्सा हब बनने के साथ ही आस-पास के जनपदों में चिकित्सा व्यवस्था को मजबूत करना होगा।

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