लखनऊ । बिना परामर्श के एंटीबायोटिक दवाओं का सेवन रोगप्रतिरोधक क्षमता से घटा रही है। अगर देखा जाए तो साधारण बैक्टीरियल संक्रमण भी अब सामान्य दवाओं से ठीक नहीं हो रहा है। बिना विशेषज्ञ के सलाह दिये एंटीबायोटिक दवाओं का सेवन नहीं करना चाहिए। यह जानकारी गोमती नगर के डा. राम मनोहर लोहिया संस्थान कि माइक्रोबायोलॉजी विभाग की हेड प्रो. ज्योत्सना अग्रवाल ने विश्व एंटीबायोटिक जागरूकता सप्ताह पर आयोजित कार्यक्रम में कही। कार्यक्रम में डॉक्टरों, पेरामेडिकल स्टाफ और फार्मासिस्ट मौजूद थे।
डा. अग्रवाल ने कहा कि जागरूकता के लिए गोष्ठी का आयोजन करके आम नागरिक ही नही साथ-साथ डाक्टरों, पैरामेडिकल स्टाफ को एंटीबायोटिक दवाओं के साइड इफेक्ट से सचेत करना चाहिए। एंटीबायटिक के सेवन बिना डाक्टर के परामर्श नहीं सेवन करना चाहिए। उन्होंने बताया कि एंटीबायटिक के साइड इफेक्ट के प्रति लोगों को सचेत करने संयुक्त राष्ट्र संघ, विश्व स्वास्थ्य संगठन, विश्व स्वास्थ्य समिति प्रत्येक वर्ष 14-20 नवंबर को विश्व एंटीबायोटिक जागरूकता सप्ताह मनाने का निर्णय लिया गया है।
एनेस्थीसिया विभाग के प्रो.आर.के.त्रिपाठी ने बताया कि मेडिकल शॉप के विक्रेता को एंटीबायटिक दवा बेचने पर सावधानी बरतनी चाहिए। उन्होंने दवा विक्रेताओं से अपील की कि एंटीबायटिक ही नहीं, बल्कि कोई भी दवा हो, उसे डॉक्टर के पर्ची के बिना न बेचा जाए। अक्सर सामान्य बीमारियों में दवा दुकानदार के परामर्श पर ही एंटीबायटिक दवाओं का सेवन करने लगते है, जो कि बाद में उन्हें असर करना ही बंद कर देती है। उन्होंने कहा कि सरकारी अस्पताल हो या निजी अस्पताल हो, सभी चिकित्सा संस्थान में आपरेशन थियेटर, आईसीयू व क्रिटकल केयर यूनिट की स्वच्छता बहुत जरूरी है, इससे मरीजों को ऑपरेशन से पहले या बाद में संक्रमण से बचने के लिए एंटीबायोटिक देना ही न पड़े।












