लखनऊ। डा. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान लोंिहया संस्थान के हास्पिटल ब्लाक इमरजेंसी में मरीज के इलाज में गंभीर लापरवाही हो रही है। तैनात डॉक्टरों ने बिना जांच पड़ताल किये ही जिंदा मरीज को मरा बता ले जाने के लिए कह दिया,जब परिजनों ने हंगामा शुरू किया तो मरीज की इजीसी में हार्ट बीट चलती मिली। सांसे भी धीमी गति से चल रही थी। डाक्टरों की लापरवाही देख परिजन मरीज को लेकर निजी अस्पताल लेकर चले गये।
सीतापुर के रहने वाले कांता प्रसाद बेहोश बेटे को लेकर बुधवार सुबह केजीएमयू के ट्रॉमा सेंटर लेकर पहुंचे। परिजनों का आरोप है कि यहां पर डॉक्टरों ने बेहोश मरीज को वेंटिलेटर की आवश्यकता बताते हुए वेंटिग में रखने के लिए कहा। डाक्टरों का कहना था कि वेंटिलेटर खाली नही है। इस पर परिजन दोपहर करीब बारह बजे कांता प्रसाद बेटे विकास को एम्बुलेंस से लेकर लोहिया संस्थान के हॉस्पिटल ब्लॉक की इमरजेंसी में पहुंचे। मरीज को लगातार एम्बुबैग के सहारे सांसें दी जा रही थीं। परिजनों इमरजेंसी में जाकर डॉक्टर से मरीज का हाल बताते हुए इलाज के पेपर दिखाये। परिजनों का आरोप है कि डॉक्टर ने मरीज को बिना देखे मरीज को मृत घोषित कर दिया। डॉक्टर के इस फरमान पर परिजन आक्रोशित हो गये आैर हंगामा शुरू कर दिया।
हंगामा होता देख डॉक्टर ने पैरामेडिकल स्टाफ को इमरजेंसी में भेज कर फिर ईसीजी जांच कराकर ब्लड प्रेशर कराया। शरीर में ऑक्सीजन लेबर देखने के साथ ही रिपोर्ट में यह भी पता चला कि मरीज का हार्ट बीट काम कर रही है आैर पल्स भी ठीक थी। ब्लड प्रेशर भी नियंत्रण में है। डाक्टरों की लापरवाही को देख डॉक्टर पर कोताही का आरोप लगाया। इसके बाद मरीज को लेकर प्राइवेट अस्पताल लेकर चले गये। परिजनों का आरोप है कि डॉक्टरों ने जांच के बाद भी इमरजेंसी में पांच में एक वेंटिलेटर खाली होने के बाद भी देने से मना कर दिया। हालांकि संस्थान प्रशासनिक व डाक्टरों ने परिजनों के आरोप को नकारते हुए कहा मरीज को केजीएमयू में मृत बताया गया था। यहां की इमरजेंसी में की गयी जांच में मरीज की सांसें चल रही थीं।
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