लखनऊ। पचास प्रतिशत लोग कभी न कभी पाइल्स व फिशर की समस्या से पीड़ित होते है। समय पर बेझिझक विशेषज्ञ डाक्टर से इलाज कराकर तथा इलाज व जीवनशैली में सुधार कर बीमारी पर काबू पा सकते हैं। यह जानकारी किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के जनरल सर्जरी विभाग के डॉ. अरशद अहमद ने सर्जरी विभाग के 107 वें स्थापना दिवस पर चल रही सर्जिकल अपडेट कार्यशाला में कही।
डॉ. अहमद ने कहा कि 50 प्रतिशत आबादी को जीवन में कभी न कभी पाइल्स व फिशर जैसी समस्या का सामना करना पड़ सकता है। इससे बचने के लिए जीवनशैली में सुधार करें। फास्ट-फूड के सेवन से बचें। रेशेदार फलों तथा हरी सब्जियां खाएं। उन्होंने बताया कि फलों को खाये लेकिन जूस से परहेज करें। बड़ी आंत में पानी व फाइवर ही पहुंचता है। फिशर से बचने के लिए रोजाना तीन लीटर पानी पीना चाहिए। उन्होंने बताया कि पाइल्स व फिशर से पीड़ित 75 प्रतिशत मरीजों को ऑपरेशन की जरूरत नहीं पड़ती है।
डॉ. अरशद ने बताया कि शौच संबंधी परेशानी बताने में लोग झिझक महसूस करते हैं। 60 से 70 प्रतिशत मरीज मनमर्जी से इलाज कराते हैं। बिना डॉक्टर की सलाह के मेडिकल स्टोर से दवाएं खरीदकर खाते हैं। नीम हकीम के पास इलाज के लिए जाते हैं। इसमें काफी समय गुजर जाता है। शर्म और झिझक छोड़कर योग्य डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए। पैदल चलने से सुस्ती दूर होती है। मांसपेसियों के साथ आंतों का काम बढ़ता है। इससे पाचन क्षमता मजबूत होती है। यदि पाचन दुरुस्त रहता है तो पाइल्स व फिशर जैसी समस्या पास नहीं फटेगी।
डॉ. अरशद ने बताया कि शौच के रास्ते की बीमारी से निजात पाने के लिए ऑपरेशन से डरे नहीं। फिस्टुला का सटीक इलाज ऑपरेशन से संभव है। इसके अलावा डा. अवनीश, विभागाध्यक्ष डा. अभिनव अरुण सोनकर के अलावा अन्य विशेषज्ञों ने नयी तकनीक से सर्जरी की जानकारी दी।
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