लखनऊ। संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान के विशेषज्ञ डाक्टरो ने बांग्लादेश के ढाका से आयी बोकुल अख्तर की एंजियोप्लॉस्टी कर जान बचायी। विशेषज्ञों के अनुसार अब महिला की तबियत में सुधार है। महिला की कल डिस्चार्ज कर दिया जाएगा। ढाका के अस्पताल में जांच के बाद भी ब्लाकेज का पता वहां के डाक्टर नहीं लगा पाये थे। इससे इलाज में देरी महिला की जान का खतरा बन सकता था।
कार्डियोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ. पीके गोयल के मुताबिक बोकुल अख्तर को एक महीने से सीने में तेज दर्द हो रहा था। ढाका के अस्पताल में जांच करायी, लेकिन उसमें कोई हार्ट में ब्लॉकेज का पता नहीं चला। किसी से जानकारी लेकर किसी तरह पूछते हुए दर्द लगातार बना रहने पर वह पीजीआई पहुंची। परिजनों ने पहले उन्हें पीजीआई के गेस्ट्रो विभाग में विशेषज्ञ डाक्टर को दिखाया। पेट रोग विशेषज्ञ ने जांच के बाद हार्ट में दिक्कत होने की बता कर कार्डियोलॉजी विभाग रेफर कर दिया। गुरुवार को डॉ. पीके गोयल ने महिला देखने के बाद तुरन्त एंजियोग्राफी करने का निर्णय लिया।
जिसमें लेफ्ट की मेन आर्टरी में ब्लॉकेज की पता चली। इसके बाद आनन-फानन उन्होंने महिला को भर्ती किया और एंजियोप्लास्टी कर दी। डॉ. गोयल बताते हैं कि ऐसे मामले में अक्सर डाक्टर सर्जरी करते हैं। यदि महिला सर्जरी कराती, तो पीजीआई में तीन महीने से लेकर एक वर्ष की वेटिंग है। ऐसे में महिला की जान को जोखिम हो सकता था। उन्होंने स्थिति भांपते हुए तुरन्त एंजियोप्लास्टी कर महिला की जान बचायी। महिला को इलाज में करीब 80 हजार रुपए खर्च हुआ है।
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