लखनऊ। कोविड -19 के लॉक डाउन में ब्लड बैंकों में ब्लड का संकट बन गया है। अगर यूपी के सरकारी अस्पतालों के ब्लड बैंकों की बात करें, तो ज्यादातर ब्लड बैंकों में बीस से तीस प्रतिशत ही ब्लड यूनिट शेष रह गयी है। ब्लड बैंको का मानना है कि अगर जल्द ही ब्लड डोनेशन कैम्प आैर लोग खुद ब्लडडोनेशन के लिए नहीं आये तो ब्लड बैंकों में ब्लड का संकट गहराता जाएगा। इस लिए 14 जून को मनाये जाने वाले विश्व रक्तदाता दिवस पर लोगों ब्लड डोनेशन करने की अपील की जा रही है।
कोविड -19 के लॉक डाउन में भी कोरोना के मरीजों का इलाज के अलावा जटिल व इमरजेंसी लगातार जारी रही। इनमें मरीजों के तीमारदारों ने ब्लड डोनेशन तो किया, लेकिन उससे जटिल बीमारियों में बिना डोनर के ब्लड दिये जाने से ब्लड की यूनिट कम होती गयी। किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के ब्लड ट्रांसफ्यूजन विभाग की प्रमुख डा. तूलिका चंद्रा ने बताया कि कोरोना महामारी में लगातार चले लॉकडाउन में लगने वाले ब्लड कैम्प नहीं लग पाये। संस्थाएं, स्कूल कालेज आैर अन्य अवसरों पर ब्लड कैंम्प लगते रहते है। जो कि नहीं लग पा रहे थे। इस बीच मरीजों की भर्ती भी कम हो रही थी, लेकिन इस बीच इमरजेंसी व जटिल बीमारियों का इलाज जारी था। कुछ जटिल बीमारियों में बिना डोनर के ब्लड दिये जाना नियम है, जिसके कारण ब्लड यूनिट दे दिया गया। यहीं हाल पूरे प्रदेश के ब्लड बैंकों का बना हुआ है। उन्होंने बताया कि प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में लगभग दो सौ ब्लड बैंक है।
लगभग सभी ब्लड बैंकों में देखा जाए तो उनके यहां के ब्लड बैक मिलाकर बीस से तीस प्रतिशत ब्लड यूनिट बैंकों में शेष है। इसमें खास कर निगेटिव व दुर्लभ ब्लड यूनिट नहीं के बराबर चल रहा है। उन्होंने बताया कि अब कोरोना के मरीज को भी अगर ब्लड यूनिट या अन्य अवयव की आवश्यकता होती है, तो बिना डोनर के ही ब्लड यूनिट दिया जाता है। अब अनलॉकडाउन के बाद सर्जरी व इमरजेंसी तेजी से बढ़ी है, जिससे ब्लड यूनिट की मांग भी बढ़ी है, लेकिन ब्लड डोनेशन नहीं बढ़ा है। तीमारदार भी अगर संक्रमित हुआ तो दिक्कत हो सकती है। इस लिए सभी ब्लड बैंकों ने कल विश्व रक्तदाता दिवस पर लोगों से अपील की है कि वह लोग ब्लड डोनेशन करें। इस अवसर पर ब्लड कैम्प का आयोजन भी किया जा रहा है।












