लखनऊ। एक विशेष तकनीक अलाबू विधि से शरीर के जटिल दर्द को दूर भगाने का जानकारी देंगे। नये डॉक्टर इस विधि को सीख कर मरीजों को आसानी से इलाज दे सकेंगे। इस विधि से जोड़ों, घुटनों, मांसपेशियों समेत कई प्रकार के दर्द को दूर किया जाता है। दर्द प्रबंधन पर आयोजित कार्यशाला देश भर से आयुर्वेदिक छात्र और विशेषज्ञ काफी संख्या में जुटेंगे। राष्ट्रीय स्तर की इस कार्यशाला टूड़ियागंज स्थित राजकीय आयुर्वेदिक कॉलेज एवं अस्पताल परिसर में आयोजित की जा रही है। आयुर्वेदिक तरीकों से दर्द प्रबंधन पर राष्ट्रीय स्तर की कार्यशाला पहली बार 15 फरवरी को होनी है। आयोजन कॉलेज के काय चिकित्सा विभाग की ओर से किया जा रहा है।
काय चिकित्सा के विभागाध्यक्ष डॉ. कमल सचदेवा ने बताया कि इसमें मुख्य अतिथि आयुष मंत्री धर्म सिंह सैनी, प्रमुख सचिव प्रशांत त्रिवेदी, आयुर्वेदिक निदेशक डॉ. एसएन सिंह, पाठ्यक्रम एवं मूल्याकंन के निदेशक डॉ. सुरेश चंद, अध्यक्ष प्रधानाचार्य डॉ. प्रकाश चंद्र सक्सेना आदि रहेंगे।
प्रधानाचार्य डॉ. प्रकाश चंद्र सक्सेना और डॉ. धर्मेंद्र ने संयुक्त रूप से बताया कि शरीर में 107 प्रकार के मर्म स्थित होते हैं। डा. सक्सेना ने बताया कि कफ से दूषित होने वाले खून को अलाबू विधि से शोधन किया जाता है। अलाबू एक प्रकार का यंत्र है। लौकी को काटकर अलाबू यंत्र बनाया जाता है। इससे शरीर से गंदे खून को निकाला जाता है। मुख्य रूप से अलाबू विधि से हड्डियों, मांसपेशियों, शिराएं-धमनी आदि प्रकार के दर्द का इलाज किया जाता है। इसमें जटिल दर्द के मरीज को 15 दिन से एक माह तक हर रोज 30-45 मिनट तक इलाज दिया जाता है। इससे दर्द दूर हो जाता है। साथ ही दूसरी विधाओं की दवाओं की तरह शरीर के अंगों पर कोई गलत प्रभाव नहीं पड़ता है।
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