आैर लकड़ी पर नहीं कागजों पर दर्ज हो गया सफरनामा

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लखनऊ। एक लकड़ी के बेकार पड़े काठ को काट कर बनाये गये किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय सफरनामे संग्रह को सात वर्षो से अपडेट नहीं किया गया है। इसमें चांसलर, हीवेट सहित अन्य मेडल्स के अलावा जानकारी को एकत्र नहीं किया गया है। लोगों को इस सफरनामें पूरा न होने पर नाराजगी है।

केजीएमयू में कुछ वर्ष पहले परिसर में बेकार पड़े लकड़ी के काठ को तराश कर केजीएमयू सफरनामा संग्रह बनाया गया था। यह सफरनामा अपने आप में अनूठा था। लकड़ी को काट कर एक पन्ने की तरह बनाया गया था। स्टैंड पर बनाये गये पन्ने में केजीएमयू के शुरु से लेकर इतिहास को दर्ज किया गया था। इसमें स्थापना दिवस समारोह से लेकर दीक्षांत समारोह तक का जिक्र किया गया है। डाक्टरों से लेकर मेडिकोज तक मिलने वाल े मेडल्स का जिक्र किया गया कि किस वर्ष किसको मेडल दिया गया। इस सफरनामा संग्रह को पहले तो कुलपति कार्यालय में रखा गया था। जहां पर प्रत्येक आने जाने वाले लकड़ी के पन्ने को पलटकर जानकारी एकत्र कर सकता था।

लोगों के बीच में यह काफी चर्चित भी रहा था। इसके बाद सफरनामे को पुस्तकालय में रख दिया गया है। इससे देख कर लोग जानकारी प्राप्त करते है, लेकिन केजीएमयू के प्रशासन ने लापरवाही के कारण इसको सात वर्षो से अपडेट ही नहीं कराया है। इस लापरवाही को देखकर लोग आक्रोशित होते है। इसको देखने के बाहर से आने वाले जार्जियन भी देखते है। कुछ दिन पहले गोल्डन जुबली वर्ष बनाये जाने केजीएमयू आये जार्जियन्स ने लकड़ी पर बने केजीएमयू के सफरनामा संग्रह को देखकर खुश तो हुए, लेकिन इसके अपडेट न होने पर नाराज भी हुए थे। उनका कहना कि केजीएमयू प्रशासन कागजों से निकल इसमें सफरनामा को तय करे तो बेहद अच्छा लगेगा।

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