लखनऊ। किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के ट्रामा सर्जरी विभाग के प्रमुख डा. संदीप तिवारी अपने चिकित्सा शिक्षा जीवन में रेजीडेंट शिप के दौरान के उस यादगार पल बताते है जब वह पूर्व प्रधान मंत्री अटल बिहारी बाजपेयी के साथ वार्ता में बिताये तीस मिनटों ने हम सभी के चिकित्सा शिक्षा की दिशा ही बदल दी। अभी उनके दिये गये निर्देशों को अमल में लाने की कोशिश लगातार किया करते है। यह बात डा. तिवारी पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी के निधन से दुखी है। उनका कहना है कि उनके आदर्श कभी नहीं मर सकते है। खास कर उनके जीवन में तो अटल जी से मुलाकात के वह तीस मिनट का एक – एक मिनट तक याद है।
डा. तिवारी ने बताते है कि सन 1995 की बात है। उस वक्त अटल बिहारी बाजपेयी नेता प्रतिपक्ष थे आैर वीवीआईपी गेस्ट हाऊस में रूके हुए थे। हम आैर हमारे साथ डा. संजय तिवारी, डा. मनीष भूषण, डा. आनंद त्रिपाठी आैर डा. सुधीर राठी उनसे रेजीडेंट डाक्टरों समस्याओं को लेकर मिलने पहुंच गये। लेकिन अंदर जाने नहीं दिया गया आैर सुरक्षा गार्डो ने सख्त हिदायत देते हुए बाहर ही रोक दिया। वह लोग मिलने के लिए अड़े रहे, वह सब बाहर ही बैठ गये।
शोर शराबा सुनकर वह बाहर निकले आैर हम लोगों को बहुत प्यार से अंदर ले गये। उन्होंने तीस मिनट तक विभिन्न समस्याओं आैर निराकरण पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि गरीबों की हमेशा निशुल्क चिकित्सा करना इससे बड़ी राष्ट्र सेवा नहीं हो सकती है। डा. तिवारी इसके बाद तो वह मेरे आदर्श पुरुष की तरह ह्मदय में बस गये। उन्ही के आदर्श पर चलते हुए अभी भी गांवों में लगाये जाने वाले चिकित्सा शिविरों में जाकर चिकित्सा सेवा करते है।
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