घाव के लिए अब आर्टिफिशियल त्वचा उपलब्ध

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लखनऊ। संजय गांधी पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टिट्यूट (एसजीपीजीआई) में शरीर पर होने वाले किसी भी प्रकार के गुजरना पड़ेगा। यह जानकारी एसजीपीजीई के प्लास्टिक सर्जरी एंड बर्नस विभाग के प्रमुख डॉ राजीव अग्रवाल ने दी।

डॉ. अग्रवाल ने बताया कि शरीर पर घाव हो जाने के दौरान मरीज को प्लास्टिक सर्जरी के जटिल प्रक्रिया से गुजारना पड़ता था, जिसमें 4 से 5 घंटे का समय लगा करता था। लेकिन अब आर्टिफिशियल त्वचा उपलब्ध होने से यह महज कुछ मिनट में ही मरीज के घाव पर लग जाया करेगी।
उन्होंने बताया कि प्लास्टिक सर्जरी में सभी प्रकार के घाव चाहे वह चोट लगने की वजह से हुए हों या फिर ट्यूमर होने के बाद संक्रमण से हुआ हो। इन सभी प्रकार के घावों में त्वचा प्रत्यारोपण की आवश्यकता होती है। उन्होंने बताया कि प्लास्टिक सर्जरी के इतिहास में घाव के इलाज के लिए त्वचा प्रत्यारोपण की सर्जरी सैकड़ों साल पुरानी है। मौजूदा दौर में भी घाव के इलाज के लिए स्किन ट्रांसप्लांट ही मुख्य इलाज होता है।
उन्होंने बताया कि मुख्यता स्किन ट्रांसप्लांट में दो प्रकार की तकनीकों का इस्तेमाल होता है। पहली तकनीक में मरीज की त्वचा का प्रयोग किया जाता है, जिसमें मरीज के शरीर के किसी अन्य भाग से त्वचा लेकर त्वचा को प्रत्यारोपित ( स्किन ट्रांसप्लांट) किया जाता है। लेकिन इस तरह के स्किन ट्रांसप्लांट में जिस जगह की त्वचा निकाली जाती है। वहां पर भी कुछ समय के बाद निशान पड़ जाता है। वही दूसरी तकनीक को फ्लैप प्रोसीजर कहते हैं। इस तकनीक में त्वचा के दोनों ही भाग एपिडर्मिस और डर्मिस रहते हैं। फ्लैप प्रोसीजर वाली त्वचा सामान्य त्वचा जैसी होती है और यह त्वचा अंदर के ऊतकों से चिपकती भी नहीं है तथा इसका आकार सामान्य त्वचा के जैसा ही होता है। उन्होंने बताया कि इस प्रोसीजर को करने में कई तरह की कठिनाई हो सकती हैं। इन्हीं सब दिक्कतों को देखते हुए अमेरिका में कुछ वर्ष पहले एक आर्टिफिशियल स्किन का निर्माण किया गया था। आर्टिफिशियल स्किन लगाने के दौरान ऑपरेशन बहुत ही सरल हो जाता हैआर्टिफिशियल स्किन को इंटीगरा के नाम से जाना जाता है डॉ राजीव अग्रवाल ने बताया कि बस्ती के रहने वाले एक 78 वर्षीय मरीज को मुंह की त्वचा का कैंसर हो गया था। यह कैंसर मरीज के गाल और नाक के बीच भाग में था। सामान्य रूप से इस तरह के मरीज का ऑपरेशन दो चरणों में करना पड़ता है, लेकिन आर्टिफिशियल स्किन लगाने के बाद मरीज का घाव जल्द ही भर गया।

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