केजीएमयू में लव जिहाद सिंडिकेट का नया ठिकाना
एंटी लव जिहाद मंच ने पीड़ित धर्मांतरण महिलाओं के समर्थन में की प्रेस वार्ता
लखनऊ। किंग जार्ज मेडिकल विश्वविद्यालय (केजीएमयू) के धर्मांतरण के आरोपी डा. रमीजुद्दीन उर्फ रमीज मलिक और उसके रैकेट के खिलाफ सख्त कार्यवाही की मांग को लेकर प्रेसवार्ता की गई। अधिवक्ता मिलन प्रमुख मृत्युन्जय प्रताप सिंह नें कहा कि इस अवैध धर्मांतरण प्रकरण में आरोपी डा. रमीजुद्दीन नायक उर्फ रमीज मलिक जो कि किंग जार्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी में पैथोलॉजी विभाग में जूनियर रेजिडेन्ट द्वितीय था और पहले से एक हिंदू जूनियर डॉक्टर छात्रा का धर्म परिवर्तन कराकर उससे निकाह कर चुका था।
उसका यह निकाह फरवरी 2025 में हुआ था लेकिन इस जेहादी मानसिकता ने अपने मिशन के कारण किसी भी बैचमेट से यह बात नहीं बताई और न ही किसी को उसने निकाह में बुलाया। आरोपी रमीज ने अपने सीनियरिटी का लाभ उठाकर जुलाई में प्रवेश पाई एक हिंदू डाक्टर जूनियर रेजिडेन्ट प्रथम से पुनः दोस्ती गांठ ली और अपने दो फैकल्टी और मजहबी दोस्तों के माध्यम से अपनी शानदार छवि गढ़ी। उसके बाद उसने इस हिंदू जूनियर डाक्टर छात्रा से भी शादी का प्रस्ताव रख दिया लेकिन यह भी कहा कि विवाह यह तभी करेगा जब वह मुस्लिम बन जाएगी। इसके बाद लड़की ने धर्म परिवर्तन से इंकार कर दिया। इसके बाद रमीज ने उसके साथ मारपीट शुरू की और प्राइवेट फोटो वीडियोज लीक करने की धमकी दी।
इस बीच रमीज की पहली हिन्दू रही पत्नी इस दूसरी हिंदू लड़की से संपर्क किया और बताया कि रमीज ने उसे भी मजबूर किया था और इस बीच कई लडकियों को अपने जाल में फंसाया, जिस कारण उसने भी आत्महत्या का प्रयास किया।
इस धोखे से आहत दूसरी हिंदू डाक्टर छात्रा ने आत्महत्या करने का निर्णय लिया और जहर खा लिया। उसके दोस्तों को जैसे ही यह बात पता चली तो तुरंत केजीएमयू के क्रिटिकल केयर विभाग में भर्ती करा दिया, जहां चार दिन इलाज के बाद उसकी छुट्टी हो गई।
मिलन के सह प्रमुख अम्बरीश वर्मा ने कहा जैसे जैसे मामला आगे बढ़ रहा है और अलग अलग विभागों से लोगों नें लव जेहाद की सूचना भेजी है, उससे स्पष्ट है कि यह एक पूरा रैकेट है और संगठित जिहादी तत्व शामिल है।
अतः अधिवक्ता मिलन में इसकी जांच सीधे एसटीएफ अथवा एटीएस से शीघ्र कराने की मांग की। यह भी मांग की गई कि बलात्कार के संरक्षणकर्ताओं को भी बलात्कारी के बराबर का नैतिक दोषी मानकर उनके खिलाफ भी सख्त कार्यवाही की जाए। इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए विरोध में अधिवक्ता मिलन के सदस्य दिनांक 05 जनवरी 2026 को सांथ 05.00 बजे, गोमतीनगर स्थित उच्च न्यायालय परिसर के बाहर कैंडल मार्च निकालेंगे, साथ ही प्रकरण में कड़ी कार्यवाही के लिए माननीय मुख्यमंत्री उ.प्र. सरकार, उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक, तथा लखनऊ के जिलाधिकारी, व पुलिस कमिश्नर को ज्ञापन दिया गया। यदि उचित कार्यवाही न हुयी तो अधिवक्ता मिलन न्यायालय के माध्यम से उचित कानूनी उपायों को अपनायेगी तथा आमजन को भी जोड़कर ऐसे असमाजिक तत्वों का पर्दाफाश किया जायेगा। प्रेसवार्ता में अधिवक्ता निकिता मिश्रा, ममता पांडेय, अधिवक्ता श्रेणी प्रमुख शैलेन्द्र सिंह राजावत समेत अन्य कई अधिवक्ता शामिल हुए।











