ब्लैक फंगस से एक और मरीज की मौत

0
793
streaming blood

 

Advertisement

 

लखनऊ। राजधानी में ब्लैक फंगस संक्रमण से एक और मरीज की मौत हो गई है। ब्लैक फंगस से अभी तक राजधानी में दो मौत हो चुकी है। वही किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय सहित लोहिया संस्थान में भी ब्लैक फंगस के मरीजों की संख्या बढ़ी है। राजधानी में वर्तमान आंकड़ों के अनुसार ब्लैक फंगस के 20 मरीजों का इलाज चल रहा है। इनमें 13 मरीज केजीएमयू में भर्ती हैं, जबकि तीन मरीजों का इलाज लोहिया संस्थान में चल रहा है। वही निजी क्षेत्र के हॉस्पिटल सिप्स में ब्लैक फंगस से संक्रमित 4 मरीजों की सर्जरी की गई है। इसके अलावा ब्लैक फंगस से पीड़ित एक मरीज की इलाज के दौरान मौत हो गई है। सिप्स हॉस्पिटल के प्रबंधक डॉ आर के मिश्रा ने बताया सर्जरी किए गए ब्लैक फंगस के संक्रमित मरीज फर्स्ट स्टेज में थे, जबकि जिस मरीज की मौत हुई है। उसमें ब्लैक फंगस का संक्रमण ब्रेन तक पहुंच चुका था। इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
केजीएमयू प्रवक्ता डॉ. सुधीर सिंह का कहना है कि ब्लैक फंगस संक्रमण से पीड़ित 13 मरीज भर्ती चल रहे हैं। । डॉक्टर सुधीर सिंह का दावा है कि अभी तक केजीएमयू में भर्ती ब्लैक फंगस से संक्रमित किसी मरीज की मौत नहीं हुई है। डाक्टर सुधीर सिंह ने बताया भर्ती मरीजों में सात मरीज अलग-अलग अस्पतालों से रेफर होकर आए हैं। जबकि पांच मरीज घरों लक्षण दिखने पर भर्ती कराए गए हैं। एक मरीज आईडीएच में भर्ती था जहां पर उसमें लक्षण देखा गया है, अभी तक इलाज के दौरान मरीज में अन्य किसी प्रकार की दिक्कत नहीं हुई हैं। डॉ राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. विक्रम सिंह के मुताबिक ब्लैक फंगस के तीन मरीज भर्ती हैं। सभी मरीजों का विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम द्वारा मरीजों का इलाज किया जा रहा है और उनकी हालत स्थिर है। उन्होंने बताया जब तक मरीज की कल्चर रिपोर्ट नहीं आ जाती है,तब तक इस फंगस के बारे में स्पष्ट रूप से कहना मुश्किल रहता है। विशेषज्ञ डॉक्टरों की माने तो ब्लैक फंगस यानी म्यूकोरमाइकोसिस के मरीजों की तेजी से बढ़ रही है। डायबिटीज मरीज कोरोना की चपेट में आने के बाद स्टराइड डॉक्टर की सलाह पर ही लें। क्योंकि डायबिटीज मरीजों पर पहले से रोगों से लड़ने की ताकत कम होती है। संक्रमण के इलाज के दौरान स्टराइड दवा के प्रयोग से रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है। इससे ब्लैक फंगस के संक्रमण का और खतरा बढ़ जाता है। बताया जाता है कि यह फंगस लकड़ी, गोबर के कंडे, गमले व नाक में पाया जाता है। इसके अलावा फंगस से संक्रमित होने का दूसरा कारण ऑक्सीजन मास्क का संक्रमित होना है।

 

Previous articleकोरोना मरीजों के तीमारदारों की होगी काउंसलिंग
Next articleराजधानी में म्यूकरमाइकोसिस के अब 29 मरीज

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here