आरोप: समय पर इलाज मिला नहीं, एंबुलेंस में मौत

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लखनऊ। किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के ट्रामा सेंटर की व्यवस्था में सुधार नहीं ंहो रहा है। शनिवार को गंभीर मरीज को भर्ती कराने के लिए तीमारदार दो घंटे तक डॉक्टर और कर्मचारियों से फरियाद करते रहे, लेकिन मरीज भर्ती नही हो पाया। समय पर इलाज न मिलने के कारण एम्बुलेंस में मरीज की तबीयत बिगड़ रही थी, कुछ देर में मरीज की एम्बुलेंस में ही सांसें थम गयी। ट्रामा सेंटर परिसर में एम्बुलेंस के अंदर मरीज की मौत का यह प्रकरण पहला नहीं है। आये दिन बिस्तर न मिलने के कारण मरीज अंदर तक पहंुच कर प्राथमिक इलाज तक नहीं ले पाता है आैर भर्ती के इंतजार में एम्बुलेंस में मौत हो जाती है।

बताया जाता है कि सुलतानपुर निवासी अजय कुमार सिंह को करीब एक हफ्ते से श्वसनतंत्र में दिक्कत बनी हुई थी, इससे सांस लेने में दिक्कत के साथ ही बुखार भी आ रहा था। तीमारदारों ने पहले मरीज को स्थानीय निजी अस्पताल में दिखाया। कोई फायदा न होने पर वहां के डॉक्टर ने जांच करायी, तो मरीज के प्लेटलेट्स की कमी और फेफड़े में पानी होने की पुष्टि हुई। तीमारदार शिव शंकर सिंह ने बताया कि एम्बुलेंस से मरीजों को लेकर शनिवार दोपहर करीब 12 बजे ट्रॉमा सेंटर पहुंचे। मरीज को भर्ती कराने के लिए इमरजेंसी में काउंटर दर काउंटर व वहां पर मौजूद डाक्टरों से मरीज को भर्ती कर देख लेने की फरियाद करते रहे। इसके बाद भी किसी ने मरीज को नहीं देखा तक नहीं। यहां तक कहा गया कि प्राथमिक उपचार शुरू दीजिये, ताकि मरीज की हालत स्थिर हो जाए, लेकिन कोई सुनवाई न होने पर एंबुलेंस में ही मरीज की हालत खराब होती जा रही। भर्ती कराने की दौड़ में दो घंटे मरीज की एंबुलेंस में रहा आैर उसकी परेशानी बढ़ती गयी। इस बीच उसने दम तोड़ दिया।
केजीएमयू के डा. सुधीर सिंह ने बताया कि ट्रामा सेंटर में चार सौ बिस्तरों पर लगातार इलाज होता रहता हैं। लगभग डेढ़ सौ स्ट्रेचर है, जो मरीजों के इलाज के लिए पूरे ट्रामा सेंटर में इधर से उधर रहते है। उन्होंने बताया कि ट्रामा सेंटर में प्रदेश भर से मरीज यहां आ रहे हैं। मरीजों का भर्ती का प्रेशर रहता है। गंभीर मरीजों का स्ट्रेचर पर भर्ती कर मरीजों को इलाज मुहैया कराया जा रहा है। ऐसा नहीं है यहां आने वाले सभी मरीजों को इलाज मुहैया कराया जाता है। एम्बुलेंस में मरीज की मौत के मामले की जानकारी नहीं है। इस प्रकरण पर जानकारी तलब की जाएगी।

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