एलर्जी के प्रति जागरूकता जरूरी

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लखनऊ। विश्व एलर्जी सप्ताह (2-8 अप्रैल) के समापन अवसर पर एलर्जी रोगों के प्रति जागरूकता के लिए किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के रेस्पाइरेटरी मेडिसिन एवं पल्मोनरी व क्रिटिकल केयर के संयुक्त तत्वावधान में कार्यक्रम का विभागाध्यक्ष प्रो. सूर्यकांत ने किया। उन्होंने एलर्जी से सम्बंधित विभिन्न रोगों को सामान्य भाषा में बताया और एलर्जी की बीमारी के बारे में जागरूकता आवश्यक है। भारत में लगभग 25 फीसदी जनसंख्या एक या एक से अधिक एलर्जी रोगों से पीड़ित है। एलर्जी तब होती है जब शरीर किसी पदार्थ के प्रति प्रतिक्रिया करता है। यह मामूली से कठिन समस्या तक हो सकती है। वह पदार्थ जिसके कारण प्रतिक्रिया होती है, एलर्जन कहलाता है।

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विश्व एलर्जी सप्ताह पर केजीएमयू में गोष्ठी –

एलर्जी के विभिन्न प्रकार होते हैं। एलर्जिक राइनाइटिस या नाक की एलर्जी मौसमी या बारहमासी हो सकती है, विशेष रूप से यह पराग कणों के कारण मौसम बदलने के दौरान होता है। इससे नासिका वायुमार्ग में सूजन आ जाती है और छींके, नाक में खुजली व पानी तथा नाक का बंद हो जाना जैसे लक्षण होते हैं। एलर्जी की वजह से साइनस में सूजन आ जाती है जिसे हम साइनुसाइटिस कहते हैं। बच्चों में एलर्जी की परेशानी यदि लंबे समय तक बनी रहती है तो कान बहना, कान में दर्द, कम सुनना, बहरापन जैसी परेशानियां भी हो सकती हैं। हमारे शरीर की संरचना के हिसाब से नाक, कान और गला आपस में किसी न किसी माध्यम से जुड़े होते हैं।

इसलिए इनमें से किसी में भी संक्रमण या सूजन आने पर सभी पर असर होता है। यही कारण है कि एलर्जी की वजह से नाक में सूजन के लक्षण प्रकट होने पर साइनस में, कान में दर्द और गले में खराश और आवाज में परिवर्तन भी दिखाई देता है। यही कारण है कि यदि बचपन में ये परेशानी लंबे समय तक बनी रहे तो बड़े होने पर भी आवाज में नाक से बोलने का प्रभाव या उच्चारण साफ न होने वाली परेशानियाँ बनी रह जाती हैं। इस मौके पर डा. अजय कुमार वर्मा, डा. अम्बरीश, डा. अनुभूति व कई जूनियर डाक्टर मौजूद थे।

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