लखनऊ. किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय मैं ट्रामा सेंटर में शनिवार को लगी आग बाद चिकित्सा व्यवस्था को पटरी पर लाने की कवायद तेजी से शुरू हो गई है. पर चर्चा इस बात की है केजीएमयू प्रशासन अब ट्रामा सेंटर की प्रबंधन से लेकर कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों की व्यवस्था में बदलाव करने का मूड बना चुका है. यह बदलाव टॉप टू बॉटम होने की आशंका है. हालांकि अभी के केजीएमयू प्रशासन मैं अभी कोई औपचारिक घोषणा नहीं की है और व्यवस्था को सुधारने में जुटा हुआ है. बताया जाता है अग्निकांड के बाद ट्रामा सेंटर में अव्यवस्था और बजट की कमी खुलासा आम हो गया . ट्रामा सेंटर को लेकर केजीएमयू में डॉक्टरों वर्चस्व की होड़ लगी हुई है.
कुछ समय पहले कुलपति डॉक्टर एमएलबी भट्ट ने ट्रामा सेंटर की व्यवस्था को बदलने का मन बनाया था . अपने निरीक्षण में उन्होंने काफी हद तक चिकित्सा व्यवस्था और मरीजों की दिक्कतों को दूर करने के निर्देश दिए थे .बताया जाता है कि कुछ प्रशासनिक अधिकारियों ने अपना पद खतरे में देख कुछ राजनीतिक दलों से सिफारिश तक करा चुके हैं. इस कारण कुलपति को अपने हाथ पीछे खींचने पड़े थे. पर अब अग्निकांड के बाद एक बार फिर ट्रामा सेंटर की व्यवस्था को बदलने का तैयारी कर चुके हैं.
ट्रामा सेंटर की व्यवस्था को लेकर भी डॉक्टरों के दो गुट अलग-अलग हैं एक गुट का कहना है की बजट की कमी के चलते ट्रामा सेंटर की व्यवस्था को सुधारने में दिक्कत आती है मरीजों की संख्या दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है. इस कारण यहां की व्यवस्था को संभालने के लिए बजट को दुगना किया जाना चाहिए. वहीं दूसरे गुट का कहना है वर्तमान में बजट कब होने के बावजूद चिकित्सा व्यवस्था में महत्वपूर्ण परिवर्तन किए जा सकते हैं यह एक टीम वर्क होना चाहिए ना की वर्चस्व का मुद्दा होना चाहिए.
सभी लोग अपने अपने तरीके से शब्द रुपी बाण चला रहे हैं अब देखना यह है जिसका तीर निशाने पर बैठता है. फिलहाल सभी निर्णय कुलपति एम एल बी भट्ट को लेना है.












