लखनऊ। डा. राम मनोहर लोहिया अस्पताल व संस्थान में विलय को लेकर शनिवार को हरी झंडी मिल गयी है। स्वास्थ्य विभाग अधिकारियों का कहना है कि सोमवार को प्रमुख सचिव की मंजूरी के बाद चिकित्सा शिक्षा व स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के बीच बैठक होगी। बैठक के बाद विलय की प्रक्रिया को अंतिम रूप दिया जाएगा। इस प्रक्रिया को पूरा होने में एक से डेढ़ महीने का वक्त लग सकता है। सोमवार को विलय संबंधी अधिकृत आदेश जारी होने की संभावना है। विलय के बाद वर्तमान में एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहे छात्रों ने राहत की सांस ली है।
बताते चले कि लोहिया अस्पताल व संस्थान के विलय की चर्चा बीते चार साल से चल रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान और अस्पताल के विलय की घोषणा करने के बाद इसका कैबिनेट में भी इसका प्रस्ताव पास हो चुका है। फिर भी कुछ कारणांे से विलय का प्रस्ताव दस्तावेजों में दबा रहा। भाजपा की सरकार बनने के बाद विलय क प्रक्रिया की तेज हुई। विभागीय सूत्रों की माने तो स्वास्थ्य विभाग के साथ संस्थान में अस्पताल का विलय के प्रस्ताव पर शनिवार को हस्ताक्षर हो गए हैं। लोहिया संस्थान के प्रस्ताव के अनुसार डॉक्टर व कर्मचारियों के पदों का सृजन होगा। तब तक डॉक्टर प्रतिनियुक्ति पर रहेंगे।
विलय के बाद मरीजों के इलाज का शुल्क पर निर्णय लिया जाएगा कि अस्पताल के अनुसार एक रूपये पर्चे पर इलाज होगा या संस्थान के अनुसार पंजीकरण शुल्क जमा करना होगा। एससीआई ने एमओयू को नियम के विपरीत बताते हुए विलय ही एक मात्र उपाय बताया था। उनके मानकों के अनुसा 150 एमबीबीएस की सीटों के लिए 600 बेड का मानक होना चाहिए। लोहिया संस्थान के पास जनरल मरीजों के लिए 200 बेड ही हैं। बाकी 350 बेड सुपर स्पेशियलिटी के हैं। इन बेड को एमबीबीएस के मानक के लिए नहीं जोड़ा जा सकता है। इस वजह से अस्पताल के 450 बेड संस्थान को चाहिए। दोनों संस्थान के विलय से 650 बेड का मानक पूरा हो जाएगा।
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