लखनऊ। राज्य अंग एवं ऊतक प्रत्यारोपण संगठन (सॉट्टो – उ. प्र.) और एसजीपीजीआईएमएस के चिकित्सालय प्रशासन एवं नेफ्रोलॉजी विभाग द्वारा आयोजित पाँच दिवसीय राष्ट्रीय प्रशिक्षण कार्यक्रम ‘लाइफकनेक्ट ट्रांस-कोऑर्ड’ (25–29 अक्टूबर 2026) का तीसरा दिन बुधवार को संस्थान के एच.जी. खुराना सभागार में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। राष्ट्रीय अंग एवं ऊतक प्रत्यारोपण संगठन (नोट्टो) के तत्वावधान में उत्तर प्रदेश में पहली बार हो रहे इस ऐतिहासिक प्रशिक्षण में सरकारी और निजी क्षेत्रों के 100 से अधिक प्रत्यारोपण समन्वयक हिस्सा ले रहे हैं।
विविध अंगों और ऊतकों के प्रत्यारोपण पर विशेषज्ञों का मंथन
कार्यक्रम के तीसरे दिन की शुरुआत पिछले सत्रों के रीकैप के साथ हुई। इसके बाद चिकित्सा जगत के प्रतिष्ठित विशेषज्ञों ने किडनी, लिवर, कॉर्निया, हाथ, त्वचा, बोन मैरो जैसे अंगों और ऊतकों के प्रत्यारोपण के तकनीकी और कानूनी पहलुओं पर विस्तार से प्रकाश डाला।
नेफ्रोलॉजी विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. नारायण प्रसाद ने किडनी प्रत्यारोपण के लिए प्राप्तकर्ता की चिकित्सकीय तैयारी, दाता-प्राप्तकर्ता के मूल्यांकन और प्रबंधन पर विस्तृत जानकारी दी। सर्जिकल गैस्ट्रोएंटेरोलॉजी की प्रो. सुप्रिया शर्मा ने लिवर प्रत्यारोपण को समन्वयकों के दृष्टिकोण से समझाया।
यहडॉ. शिप्रा अग्रवाल (डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान) ने नेत्र बैंकिंग, कॉर्निया दान और इससे जुड़े कानूनों को साझा किया। केजीएमयू के प्लास्टिक सर्जरी विभागाध्यक्ष प्रो. विजय कुमार ने देश में हाथ प्रत्यारोपण (हैंड ट्रांसप्लांट) की संभावनाओं और चुनौतियों पर व्याख्यान दिया।
अस्पताल प्रशासन की सहायक आचार्य डॉ. अनिता जोस एलेनकिल ने प्राधिकार समिति (ऑथराइज़ेशन कमेटी) से अनुमोदन की पूरी प्रक्रिया समझाई। दोपहर के सत्र में प्रो. अंकुर भटनागर ने त्वचा दान और स्किन बैंकिंग, और हिमेटोलॉजी के अपर आचार्य डॉ. संजीव ने बोन मैरो प्रत्यारोपण के सामान्य सिद्धांतों पर जानकारी दी।
कानूनी पहलुओं और सामाजिक सहभागिता पर जोर
प्रत्यारोपण प्रक्रिया में विधिक जटिलताओं को दूर करने के लिए आरएमएल आयुर्विज्ञान संस्थान की फॉरेसिंक मेडिसिन विभागाध्यक्ष प्रो. ऋचा चौधरी ने अंगदान से जुड़े मेडिको-लीगल पहलुओं पर बात की। वहीं, केजीएमयू की प्रो. सुजाता देव ने स्कूलों, कॉलेजों, धर्मगुरुओं और मीडिया के माध्यम से समाज में अंगदान के प्रति जागरूकता बढ़ाने और एनजीओ की भूमिका पर जोर दिया।
सॉट्टो-उत्तर प्रदेश ने सभी प्रदेशवासियों से आगे आकर अंगदान का संकल्प लेने का आह्वान किया है। संगठन का कहना है कि व्यक्ति को अंगदान का संकल्प लेने के बाद अपने परिवार को अपनी इस इच्छा के बारे में अवश्य बताना चाहिए, क्योंकि ब्रेन डेड या मृत्यु के उपरांत अंतिम निर्णय परिवार का ही होता है। इच्छुक नागरिक सॉट्टो-उ.प्र. की आधिकारिक वेबसाइट [https://sottoupdoha.in/pledge.php](https://sottoupdoha.in/pledge.php) पर जाकर ऑनलाइन संकल्प ले सकते हैं।
समारोह के दौरान सभी सफल प्रतिभागियों को नोट्टो पंजीकरण संख्या युक्त प्रमाण-पत्र वितरित किए जाएंगे। इस वृहद कार्यशाल में आयोजन सचिव डॉ. क्रिस अग्रवाल, सह-आयोजन सचिवों (डॉ. दीक्षा दुबे, डॉ. मुशर्रफ़ हसन, डॉ. एकता यादव, डॉ. अर्पिता तिवारी, डॉ. नेहा राय, डॉ. सेजल गुप्ता, डॉ. हर्षिता चौधरी) तथा कार्यक्रम समन्वयकों) की विशेष भूमिका रही है।












