लखनऊ। राजधानी के संजय गांधी पीजीआई (SGPGI) के इमरजेंसी सेंटर में सोमवार को उस समय अफरा-तफरी का माहौल बन गया, जब एक मरीज की मौत के बाद परिजनों ने शव को इमरजेंसी में रखकर जमकर हंगामा किया। मामला अंसल सोसायटी निवासी 57 वर्षीय विजय कुमार की मौत के बाद डेथ सर्टिफिकेट जारी करने को लेकर हुआ।
स्ट्रेचर छूटने से मौत का आरोप
मृतक के परिजन राजकुमार श्रीवास्तव ने संस्थान प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि मरीज की सांसें एम्बुलेंस से उतारते समय चल रही थीं। उनका आरोप है कि मरीज का वजन अधिक होने के कारण एम्बुलेंस कर्मियों से स्ट्रेचर छूट गया और गिर जाने की वजह से उनकी मौत हो गई। परिजनों का तर्क है कि दुर्घटना अस्पताल परिसर में हुई है, इसलिए इमरजेंसी के डॉक्टर ही उन्हें डेथ सर्टिफिकेट जारी करें।
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डॉक्टर बोले- अस्पताल पहुंचने से पहले हुई मौत
दूसरी ओर, पीजीआई में तैनात मेडिकल ऑफिसर ने परिजनों के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि मरीज की मृत्यु अस्पताल पहुंचने से पहले (Brought Dead) ही हो चुकी थी। नियमानुसार, अस्पताल में भर्ती होने से पहले हुई मौत के मामलों में इमरजेंसी डॉक्टर द्वारा डेथ सर्टिफिकेट जारी नहीं किया जा सकता। इसी वजह से प्रमाण पत्र देने में असमर्थता जताई गई।
शाम तक जारी रहा ड्रामा, पुलिस बल तैनात
डेथ सर्टिफिकेट न मिलने से नाराज परिजनों ने दोपहर से लेकर देर शाम तक इमरजेंसी सेंटर में हंगामा किया, जिससे वहां मौजूद अन्य मरीजों और तीमारदारों में हड़कंप मच गया। सूचना मिलते ही सुरक्षा अधिकारी और पीजीआई चौकी इंचार्ज पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस और सुरक्षाकर्मियों ने परिजनों को समझा-बुझाकर शांत कराने का भरसक प्रयास किया, लेकिन देर शाम तक मामले में कोई सहमति नहीं बन सकी थी।












