लखनऊ। केजीएमयू (किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय) के नर्सिंग कॉलेज की छात्रा दिव्यांशी यादव की मौत के बाद पिछले सोमवार से जारी छात्रों का विरोध-प्रदर्शन आखिरकार शुक्रवार को समाप्त हो गया। यूनिवर्सिटी प्रशासन द्वारा निष्पक्ष जांच और अन्य प्रमुख मांगों पर सकारात्मक आश्वासन मिलने के बाद प्रदर्शनकारी छात्र-छात्राओं ने धरना वापस लेने का फैसला किया है।
डीन व प्रवक्ता ने धरना स्थल पहुंचकर की वार्ता
शुक्रवार को डीन पैरामेडिकल एवं प्रवक्ता डॉ. केके सिंह ने धरना स्थल पर जाकर छात्रों से सीधे बातचीत की। वार्ता के दौरान उन्होंने छात्रों की समस्याओं को सुना और यूनिवर्सिटी प्रशासन की ओर से जरूरी कदम उठाने का भरोसा दिलाया। छात्रों ने बताया कि हालांकि डीन और प्रिंसिपल को पद से हटाने की मांग पर सहमति नहीं बन सकी, लेकिन अन्य महत्वपूर्ण मांगों को स्वीकार कर लिया गया है।
जांच अंतिम चरण में, बनारस व जौनपुर गई समिति
मामले की जांच को लेकर प्रवक्ता डॉ. केके सिंह ने बताया कि दिव्यांशी की मौत के कारणों का पता लगाने के लिए गठित समिति की जांच लगभग अंतिम चरण में है। वह स्वयं इस समिति के सदस्य हैं।
साक्ष्य जुटाने बनारस पहुंची टीम: समिति के सदस्यों ने छात्रा के इलाज और मौत से जुड़े मेडिकल तथ्यों व दस्तावेजों की पड़ताल के लिए बनारस का दौरा किया।
परिजन से मुलाकात: जांच टीम जौनपुर स्थित दिव्यांशी के पैतृक गांव भी पहुंची, जहां शोक संतप्त परिवार से मुलाकात कर संवेदना जताई गई। इस दौरान कुलपति डॉ. सोनिया नित्यानंद ने फोन पर छात्रा के पिता और परिजनों से सीधे बात भी की।
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इन प्रमुख मांगों पर बनी सहमति
आंदोलन वापस लेने के साथ ही छात्रों और प्रशासन के बीच निम्नलिखित बिंदुओं पर सहमति बनी है:
मेडिकल लीव: छात्रों को प्रत्येक सेमेस्टर में 10 दिन की मेडिकल लीव का प्रावधान मिलेगा।
अटेंडेंस व छूटी कक्षाएं: आंदोलन के कारण छूटी कक्षाओं, थ्योरी और प्रैक्टिकल की अटेंडेंस की भरपाई कराई जाएगी।
कार्रवाई से राहत: प्रदर्शन में शामिल किसी भी छात्र या छात्रा पर कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी।
यूनिवर्सिटी प्रशासन के भरोसे के बाद छात्रों ने अपना धरना खत्म करने का ऐलान कर दिया। शनिवार से सभी नर्सिंग छात्र नियमित रूप से अपनी कक्षाओं और क्लीनिकल ट्रेनिंग में शामिल होंगे।












