लखनऊ। संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (SGPGI) के एपेक्स ट्रॉमा सेंटर (ATC) में ऑर्थोपेडिक्स और मल्टीडिसिप्लिनरी मेडिकल टीम ने एक 42 वर्षीय महिला के दाहिने जांघ की हड्डी (फिमर) का सफल ऑपरेशन कर उसे नया जीवन दिया है। गंभीर फेफड़े और हृदय रोग से पीड़ित होने के कारण महिला को सर्जरी के लिए बेहद ‘हाई-रिस्क’ श्रेणी में रखा गया था, जिसके चलते कई निजी व सरकारी अस्पतालों ने हाथ खड़े कर दिए थे।
सांस और दिल की गंभीर बीमारी से जूझ रही थी मरीज
42 वर्षीय मरीज सिस्टिक ब्रोंकिएक्टसिस और गंभीर पल्मोनरी हाइपरटेंशन जैसी जानलेवा बीमारियों से ग्रसित है। 20 दिन पहले एक हादसे में उसकी जांघ की हड्डी टूट गई थी। जब मरीज को SGPGI के एपेक्स ट्रॉमा सेंटर लाया गया, तब कमरे की हवा में उसका ऑक्सीजन सैचुरेशन लेवल (SpO2) मात्र 82% था, जबकि सामान्य स्तर 98-100% होना चाहिए।
सर्जरी के दौरान 20% था मृत्यु का जोखिम
मरीज की क्रिटिकल स्थिति को देखते हुए ऑर्थोपेडिक्स, एनेस्थीसिया, कार्डियोलॉजी और पल्मोनोलॉजी विभाग के विशेषज्ञों की एक संयुक्त टीम गठित की गई। मेडिकल विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे मरीजों में जनरल एनेस्थीसिया और पारंपरिक स्पाइनल एनेस्थीसिया दोनों ही जीवन के लिए अत्यंत खतरनाक साबित होते हैं। इस ऑपरेशन के दौरान मृत्यु का जोखिम 20% तक बना हुआ था।
अत्याधुनिक USG-गाइडेड स्पाइनल एनेस्थीसिया का कमाल
जोखिम को कम करने के लिए एनेस्थीसिया टीम ने ‘यूएसजी-गाइडेड कंटीन्यूअस स्पाइनल एनेस्थीसिया’ की अत्याधुनिक तकनीक अपनाई। इसमें रीढ़ की हड्डी में एक सूक्ष्म माइक्रो-कैथेटर डालकर थोड़ी-थोड़ी मात्रा में नियंत्रित दवा दी गई। इस तकनीक की वजह से मरीज के ब्लड प्रेशर और हार्ट रेट में कोई खतरनाक उतार-चढ़ाव नहीं आया।
मिनिमली इनवेसिव तकनीक से बची जान, दूसरे दिन से चलने लगी मरीज
ऑर्थोपेडिक्स टीम ने खून के नुकसान को रोकने के लिए ‘मिनिमली इनवेसिव सर्जरी’ तकनीक का इस्तेमाल किया। बहुत छोटे चीरे के जरिए फ्रैक्चर को ठीक किया गया, जिससे रक्तस्राव बेहद कम हुआ। एडवांस आईसीयू मॉनिटरिंग में 1 दिन रखने और नियमित फिजियोथेरेपी के बाद, मरीज ऑपरेशन के दूसरे दिन से ही अपने पैरों पर चलने में सक्षम हो गई। एटीसी में 6 दिनों के इलाज के बाद मरीज को पूरी तरह स्वस्थ घोषित कर डिस्चार्ज कर दिया गया है।
चिकित्सकीय टीम:
ऑर्थोपेडिक्स: डॉ. पुलक शर्मा, डॉ. फरकान-उल-हक, डॉ. अवनीश मिश्रा, डॉ. विकास जायसवाल
एनेस्थीसिया: डॉ. वंश प्रिया, डॉ. दीक्षा रानी, डॉ. मणि दुबे
कार्डियोलॉजी: डॉ. आदित्य कपूर
पल्मोनरी मेडिसिन: डॉ. आलोक नाथ
नर्सिंग स्टाफ: सुश्री अनीता सिंह, सुश्री दीपिका, सुश्री पूनम, सुश्री रीता












