लखनऊ। हृदय एवं रक्तवाहिका संबंधी रोग (Cardiovascular Diseases) आज भी दुनिया भर में असमय मौतों का सबसे बड़ा कारण बने हुए हैं। विश्व हृदय दिवस के अवसर पर संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (SGPGIMS) के कार्डियोलॉजी विभाग ने वैश्विक अभियान “Don’t Miss a Beat” के तहत लोगों से अपील की है कि वे दिल के हल्के या सामान्य दिखने वाले संकेतों को अनदेखा न करें और समय पर डॉक्टरी सलाह लें।
इसी संदेश को जन-जन तक पहुंचाने के लिए संस्थान परिसर में एक वॉकथॉन का आयोजन किया गया, जिसमें 100 से अधिक लोगों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
अक्सर अनसुने रह जाते हैं दिल की बीमारी के यह लक्षण
संस्थान के विशेषज्ञों ने बताया कि हृदय रोग हमेशा सीने में तेज दर्द जैसी नाटकीय स्थिति के साथ सामने नहीं आता।
सांस फूलना
असामान्य थकान और चक्कर आना
सीने में हल्की असहजता या भारीपन
धड़कन का तेज या अनियमित होना
व्यायाम या पैदल चलने की क्षमता में अचानक कमी आना
अक्सर लोग इन लक्षणों को बढ़ती उम्र, तनाव या शारीरिक कमजोरी मानकर नजरअंदाज कर देते हैं, जो बाद में गंभीर रूप ले लेते हैं।
विशेषज्ञों का संदेश: रोज़ाना की सही आदतें ही बचाएंगी दिल
प्रो. आर. के. धीमन (निदेशक, एसजीपीजीआई): “दिल की सेहत केवल एक मेडिकल जिम्मेदारी नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी भी है। स्वस्थ दिल की शुरुआत रोज़ाना की आदतों से होती है—जैसे नियमित शारीरिक गतिविधि, संतुलित खान-पान, तनाव प्रबंधन और तंबाकू से पूरी दूरी।”
प्रो. आदित्य कपूर (विभागाध्यक्ष, कार्डियोलॉजी): “हृदय की देखभाल हार्ट अटैक आने से बहुत पहले शुरू होनी चाहिए। अपने बीपी, शुगर और कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित रखना बेहद जरूरी है।”
प्रो. सत्येंद्र तिवारी (अध्यक्ष, कार्डियोलॉजी सोसाइटी ऑफ इंडिया): उन्होंने विश्व हृदय महासंघ की “Keep the Beat” पहल का जिक्र करते हुए रोजाना कम से कम 20 मिनट पैदल चलने या शारीरिक रूप से सक्रिय रहने की सलाह दी।
प्रो. नवीन गर्ग: “लक्षणों की समय पर पहचान और चिकित्सकीय जांच ही बचाव और आपातकालीन स्थिति के बीच का फर्क तय करती है।
महिलाओं और युवाओं पर बढ़ता जोखिम
महिलाओं के लक्षण अलग: प्रो. रूपाली खन्ना ने स्पष्ट किया कि महिलाओं में हृदय रोग के लक्षण पुरुषों से अलग हो सकते हैं, इसलिए उनके दिल के स्वास्थ्य पर भी बराबर ध्यान देना जरूरी है।
कम उम्र में खतरा: प्रो. अंकित साहू ने चेतावनी दी कि मोटापा, निष्क्रिय जीवनशैली, खराब खान-पान और कम उम्र में बीपी-शुगर की वजह से अब युवा और बच्चे भी इसकी जद में आ रहे हैं। बचपन से ही स्वस्थ जीवनशैली अपनाना बेहद जरूरी है।
निष्कर्ष: एसजीपीजीआई का यह संदेश साफ है—अधिक चलें, समझदारी से खाएं, तंबाकू छोड़ें और अपने शरीर के संकेतों को अनसुना न करें, क्योंकि हर धड़कन महत्वपूर्ण है।












