लखनऊ। भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाने वाला अनंत चतुर्दशी का व्रत इस वर्ष 25 सितंबर को रखा जाएगा। इसे अनंत चौदस के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन भगवान श्री हरि विष्णु के अनंत रूपों की पूजा-अर्चना और गणेश प्रतिमाओं के विसर्जन का विशेष महत्व है।

तिथि, नक्षत्र और शुभ संयोग
स्वास्तिक ज्योतिष केन्द्र, अलीगंज के ज्योतिषाचार्य एस.एस.नागपाल के अनुसार:
चतुर्दशी तिथि प्रारंभ: 24 सितंबर को रात्रि 11:18 बजे
चतुर्दशी तिथि समाप्त: 25 सितंबर को रात्रि 11:06 बजे
नक्षत्र व योग: इस दिन चंद्रमा शतभिषा नक्षत्र में रहेगा। साथ ही प्रात: 05:56 बजे से दोपहर 11:22 बजे तक शुभ ‘रवि योग’ बना रहेगा।
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अनंत चतुर्दशी पूजा का शुभ मुहूर्त
अनंत चतुर्दशी की पूजा का शुभ मुहूर्त 25 सितंबर को प्रातः 05:56 बजे से लेकर रात्रि 11:06 बजे तक रहेगा। इस दौरान व्रत रखकर विष्णु सहस्त्रनाम स्तोत्र का पाठ करने से धन-धान्य, सुख-संपदा और संतान सुख की प्राप्ति होती है।
14 लोकों की रक्षा के लिए प्रकट हुए थे विष्णु जी के 14 रूप
शास्त्रों की मान्यता के अनुसार, सृष्टि के आरंभ में भगवान विष्णु ने 14 लोकों—तल, अतल, वितल, सुतल, तलातल, रसातल, पाताल, भू, भुवः, स्वः, जन, तप, सत्य और मह की रचना की थी। इन लोकों के पालन और रक्षा के लिए वे स्वयं 14 दिव्य रूपों में प्रकट हुए, जिससे वे ‘अनंत’ कहलाए। इसी कारण इस दिन उनके अनंत रूपों की पूजा की जाती है।
चौदह गांठों वाले अनंत सूत्र का महत्व
अनंत चतुर्दशी के दिन पूजा के समय हल्दी और कुमकुम से रंगा हुआ 14 गांठों का पीला धागा (अनंत सूत्र) भगवान विष्णु को अर्पित कर कलाई पर बांधा जाता है। मान्यता है कि इसे धारण करने से जीवन की सभी समस्याओं, बाधाओं और कष्टों से मुक्ति मिलती है।
गणेश उत्सव का समापन और प्रतिमा विसर्जन
दस दिनों तक चलने वाले गणेश महोत्सव का समापन भी इसी दिन होता है। पंडालों और घरों में स्थापित भगवान श्री गणेश की प्रतिमाओं का अनंत चतुर्दशी के दिन विधि-विधान से जल में विसर्जन किया जाता है।












