एंटीबायोटिक का ओवरडोज और मनमाना इस्तेमाल बन रहा जानलेवा, सेप्सिस का बढ़ा खतरा:
Antibiotic overdose and indiscriminate use are becoming life-threatening; risk of sepsis on the rise:
KGMU में एक्सपर्ट्स की चेतावनी
लखन बिना डॉक्टर की सलाह के एंटीबायोटिक दवाएं लेने की आदत आपके शरीर को गंभीर बीमारियों के सामने निहत्था बना रही है। एंटीबायोटिक दवाओं का बेहिसाब और गलत इस्तेमाल भविष्य में गंभीर संक्रमणों के इलाज को बेहद मुश्किल बना सकता है। दवाओं के प्रति बढ़ती प्रतिरोधक क्षमता (एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस) के कारण मरीज के ठीक होने में परेशानी आ रही है और सेप्सिस जैसी जानलेवा स्थिति का खतरा लगातार बढ़ रहा है।
शनिवार को किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (KGMU) में ‘विश्व सेप्सिस दिवस’ के अवसर पर आयोजित एक कार्यशाला के दौरान स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने यह चेतावनी जारी की।
स्वास्थ्य नीति में बदलाव की जरूरत
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए चिकित्सा शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव अमित कुमार घोष ने कहा कि एंटीबायोटिक के दुरुपयोग को रोकने के लिए अस्पतालों और स्वास्थ्य संस्थानों को मिलकर एक प्रभावी नीति बनानी होगी।
उन्होंने सेप्सिस की गंभीरता को समझाते हुए बताया:
क्या है सेप्सिस: यह संक्रमण के प्रति शरीर की अत्यधिक प्रतिक्रिया से होने वाली एक जानलेवा स्थिति है, जिसमें व्यापक सूजन के कारण शरीर के अंगों और ऊतकों को भारी नुकसान पहुंचता है।
मुख्य कारण: इसका सबसे बड़ा कारण जीवाणु (बैक्टीरियल) संक्रमण है। इसके अलावा निमोनिया, यूटीआई (मूत्र पथ संक्रमण), त्वचा और सॉफ्ट टिश्यू इन्फेक्शन, पेट के संक्रमण और ब्लड इन्फेक्शन से भी सेप्सिस हो सकता है।
वायरल और फंगल इन्फेक्शन से भी खतरा
KGMU के रेस्पीरेटरी मेडिसिन विभाग के अध्यक्ष डॉ. सूर्यकांत ने बताया कि केवल बैक्टीरिया ही नहीं, बल्कि इन्फ्लूएंजा और वायरल निमोनिया जैसे गंभीर वायरल संक्रमण भी सेप्सिस का रूप ले सकते हैं। वहीं कमजोर इम्युनिटी (प्रतिरोधक क्षमता) वाले मरीजों में फंगल इन्फेक्शन के कारण भी इसका खतरा बना रहता है।
डॉक्टर की पर्ची के बिना न लें दवाएं
क्रिटिकल केयर मेडिसिन विभाग के अध्यक्ष डॉ. वेद प्रकाश ने इस बात पर जोर दिया कि एंटीबायोटिक दवाएं एक सीमित संसाधन हैं और इनका उपयोग बेहद सावधानी से होना चाहिए।
बिना डॉक्टर की सलाह के एंटीबायोटिक का इस्तेमाल पूरी तरह बंद होना चाहिए।
अस्पतालों में केवल जरूरत के मुताबिक ही दवा देने की व्यवस्था को मजबूत करना अनिवार्य है, ताकि इसके दुरुपयोग और गंभीर संक्रमणों के खतरे को कम किया जा सके।












