KGMU में 9वीं आर्थ्रोस्कोपी कॉन्क्लेव और कैडेवरिक वर्कशॉप शुरू: जानें मरीजों को कैसे मिलेगा फायदा

0
52

आर्थोपेडिक विभाग प्रमुख प्रो. आशीष कुमार ने बताया कि आर्थोस्कोपी में कम नुकसान होता है, ऊतकों और मांसपेशियों को न्यूनतम क्षति पहुंचती है।

​लखनऊ। किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) के ऑर्थोपेडिक और एनाटॉमी विभाग के सहयोग से 12 और 13 सितंबर 2026 को 9वीं KGMU Arthroscopy Conclave एवं Cadaveric Workshop का आयोजन किया जा रहा है।
होटल क्लार्क अवध में‘इंडियन आर्थ्रोस्कोपी सोसाइटी’ और ‘आर्थ्रोस्कोपी एसोसिएशन ऑफ उत्तर प्रदेश’ के तत्वावधान में आयोजित इस दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य देशभर के युवा ऑर्थोपेडिक सर्जनों को दूरबीन विधि की आधुनिक शल्य चिकित्सा तकनीकों में निपुण बनाना है।

​‘की-होल सर्जरी’: कम दर्द, छोटा चीरा और तेज रिकवरी
​आयोजन अध्यक्ष प्रो. आशीष कुमार ने बताया कि आर्थ्रोस्कोपी को आम भाषा में ‘की-होल सर्जरी’ या दूरबीन विधि कहा जाता है। इसमें बड़े चीरे लगाने के बजाय बेहद छोटे छिद्रों से कैमरा और विशेष उपकरण डालकर जोड़ों की अंदरूनी चोटों का सटीक इलाज किया जाता है।
​कम नुकसान: ऊतकों और मांसपेशियों को न्यूनतम क्षति पहुंचती है।

​त्वरित रिकवरी: रक्तस्राव और दर्द काफी कम होता है, जिससे मरीज को जल्द अस्पताल से छुट्टी मिल जाती है।
​सटीक इलाज: घुटने, कंधे और अन्य जोड़ों के लिगामेंट, कार्टिलेज व मेनिस्कस की समस्याओं का आधुनिक समाधान।
​खिलाड़ियों और सेना के जवानों के लिए वरदान
​आयोजन सचिव प्रो. कुमार शांतनु के अनुसार, यह तकनीक खिलाड़ियों, रक्षा कर्मियों और शारीरिक रूप से अत्यधिक सक्रिय लोगों के लिए बेहद फायदेमंद है।

ऐसे व्यक्तियों के लिए इलाज का मतलब केवल दर्द मिटाना नहीं, बल्कि शरीर की शत-प्रतिशत कार्यक्षमता को तेजी से बहाल करना होता है। आधुनिक आर्थ्रोस्कोपिक तकनीक और वैज्ञानिक रिहैबिलिटेशन प्रोटोकॉल की मदद से मरीज बेहद कम समय में खेल के मैदान, ड्यूटी या अपनी सामान्य दिनचर्या में वापस लौट सकते हैं।
​कैडेवरिक वर्कशॉप से निखरेगा सर्जनों का हुनर
​इस कॉन्क्लेव की सबसे बड़ी खासियत कैडेवरिक वर्कशॉप (Cadaveric Workshop) है। इसमें देश भर से आए युवा डॉक्टरों को विशेषज्ञों की देखरेख में कैडेवर (मानव शरीर) पर व्यावहारिक (hands-on) प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इससे सर्जनों की शारीरिक बनावट (Anatomy) की समझ गहरी होगी और जटिल मामलों में सही निर्णय लेने की क्षमता बढ़ेगी।

​सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं का भी मिल रहा लाभ
​KGMU की कुलपति प्रो. सोनिया नित्यानंद के मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य आधुनिक चिकित्सा तकनीकों का लाभ आम जनता तक पहुंचाना है। आयोजकों ने स्पष्ट किया कि पात्र लाभार्थियों के लिए सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं के तहत भी आर्थ्रोस्कोपिक सर्जरी की सुविधा उपलब्ध है, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के मरीज भी इस अत्याधुनिक और सुरक्षित इलाज का लाभ उठाकर जल्द स्वस्थ हो सकते हैं।

Previous articleमेडिकल छात्रों के लिए बड़ी राहत : देशभर में MBBS की 13,186 सीटें बढ़ीं

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here