kgmu डॉक्टर पर गंभीर आरोप, मरीज को निजी अस्पताल भेजा, इलाज के दौरान महिला की मौत

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​लखनऊ। किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) के नेफ्रोलॉजी विभाग से एक शर्मनाक मामला सामने आया है, जहां बांड पर तैनात एक एसोसिएट प्रोफेसर पर महिला मरीज को बेहतर इलाज का झांसा देकर निजी अस्पताल में शिफ्ट कराने का आरोप लगा है। पीड़िता के पास आयुष्मान कार्ड होने के बावजूद इलाज के नाम पर एक लाख रुपये वसूल लिए गए। बृहस्पतिवार को इलाज के दौरान महिला की मौत हो गई, जिसके बाद बेटे ने मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराकर उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।

​क्या है पूरा मामला?
बस्ती जिले के कुदरहा ब्लॉक की रहने वाली 54 वर्षीय पुष्पा किडनी की बीमारी से पीड़ित थीं और इलाज के लिए केजीएमयू के नेफ्रोलॉजी विभाग की ओपीडी आई थीं। पीड़ित बेटे विजय कुमार चौधरी के अनुसार:
​निजी अस्पताल भेजने का दबाव: डॉक्टर ने फेफड़े में संक्रमण का हवाला देते हुए पाइप डालने की बात कही।

परिजनों के राजी होने पर डॉक्टर ने केजीएमयू में आयुष्मान कार्ड से मुफ्त इलाज न मिलने का दावा किया और मरीज को दुबग्गा स्थित ‘फाह हॉस्पिटल’ में भर्ती कराने को कहा।
​फ्री इलाज के बजाय वसूले पैसे: डॉक्टर के झांसे में आकर परिजनों ने मरीज को फाह हॉस्पिटल में भर्ती कराया, जहां आयुष्मान कार्डधारक होने के बाद भी उनसे करीब ₹1,000,000 ऐंठ लिए गए।
​इलाज के दौरान मौत: सही इलाज न मिलने और लापरवाही के कारण बृहस्पतिवार को महिला ने दम तोड़ दिया।
​बांड वाले डॉक्टरों की कारगुजारी, पहले भी हो चुका है।

केजीएमयू में बांड के तहत तैनात डॉक्टर पर मरीजों को बहला-फुसलाकर निजी अस्पतालों में भेजने का यह पहला मामला नहीं है।
​इससे पहले आर्थोपैडिक विभाग में बांड पर तैनात एक डॉक्टर मरीज को निजी अस्पताल ले गया था, जहां ऑपरेशन के दौरान मरीज की जान चली गई थी।
​बांड अवधि खत्म होने का हवाला देकर उस समय केजीएमयू प्रशासन ने कोई सख्त कार्रवाई नहीं की थी, जिससे ऐसे डॉक्टरों के हौसले बुलंद हैं।

​केजीएमयू प्रशासन का रुख
मामला तूल पकड़ने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन हरकत में आया है।
​”मामले की जानकारी हुई है। संबंधित डॉक्टर से जवाब तलब किया गया है। जांच में दोषी पाए जाने पर पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट डीजीएमई (DGME) को भेजी जाएगी।”
— डॉ. केके सिंह, प्रवक्ता, केजीएमयू

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