प्रदेश में पहली बार और भारत में चौथी बार हुआ यह बेहद जटिल संयुक्त ऑपरेशन।
गंभीर स्थिति: 32 हफ्ते की गर्भवती महिला गंभीर रूमैटिक हार्ट डिसीज (Rheumatic Heart Disease) से पीड़ित थी।
मल्टीडिसिप्लिनरी टीम वर्क: प्रसूति, कार्डियक, एनेस्थीसिया, कार्डियोलॉजी और नियोनेटोलॉजी के डॉक्टरों ने मिलकर दी नई जिंदगी।
लखनऊ: संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (SGPGI) के डॉक्टरों ने चिकित्सा क्षेत्र में एक असाधारण मिसाल कायम की है। संस्थान के चिकित्सकों की एक बहु-विषयक (Multidisciplinary) टीम ने 26 वर्षीय गंभीर रूप से बीमार गर्भवती महिला का पहले सिजेरियन सेक्शन (C-Section) कराया और फिर उसके तुरंत बाद ओपन-हार्ट सर्जरी करके दो हृदय वाल्वों (एओर्टिक और माइट्रल वाल्व) का सफल प्रत्यारोपण (Replacement) किया।
उत्तर प्रदेश में इस तरह का यह पहला और पूरे देश में चौथा मामला दर्ज किया गया है। डॉक्टरों के इस त्वरित और सटीक निर्णय से मां और उसकी नवजात बच्ची दोनों को सुरक्षित बचा लिया गय
सांस फूलने और धड़कन तेज होने पर कराया गया था भर्ती
26 वर्षीय मरीज पहली बार मां बनने जा रही थी। जब वह 32 हफ्ते (लगभग 8 महीने) की गर्भवती थी, तब उसे लगातार सांस लेने में तकलीफ और दिल की धड़कन अत्यधिक तेज होने (Palpitations) की शिकायत हुई। स्थिति बिगड़ने पर उसे तुरंत SGPGI में रेफर किया गया
जांच के दौरान कार्डियोलॉजी और कार्डियक सर्जनों की टीम ने पाया कि महिला गंभीर रूमैटिक हार्ट डिसीज से पीड़ित थी, जिसमें निम्नलिखित जटिलताएं मौजूद थीं:
गंभीर कैल्सिफिक एओर्टिक स्टेनोसिस (Calcific Aortic Stenosis)
गंभीर माइट्रल रीगर्जिटेशन (Mitral Regurgitation)
मध्यम पल्मोनरी हाइपरटेंशन (Pulmonary Hypertension)
चिकित्सकों के अनुसार, गर्भावस्था को जारी रखना या सामान्य प्रसव कराने का प्रयास करना मां और अजन्मे बच्चे दोनों के लिए जानलेवा साबित हो सकता था।
दो चरणों में पूरा हुआ ‘महा-ऑपरेशन’
21 जुलाई 2026 को मैटरनल एंड रिप्रोडक्टिव हेल्थ, कार्डियोवैस्कुलर, एनेस्थिसियोलॉजी, कार्डियोलॉजी और नियोनेटोलॉजी के विशेषज्ञों की संयुक्त टीम ने बेहद बारीक और सटीक योजना बनाकर यह ‘हाई-रिस्क’ ऑपरेशन शुरू किया।











