नई दिल्ली / बिजनेस डेस्क: वित्तीय बाजार (Financial Market) में हर निवेशक का एक ही सपना होता है—कम समय में ज्यादा से ज्यादा मुनाफा कमाना। लेकिन क्या आप जानते हैं कि निवेश की दुनिया में हाई रिटर्न से भी ज्यादा अहमियत ‘समय’ (Time Period) की होती है? अगर आप निवेश में लंबी अवधि तक टिके रहते हैं, तो कंपाउंडिंग (Compounding) की ताकत आपके छोटे से निवेश को भी बड़े फंड में बदल सकती है।
आइए इसे दो आसान उदाहरणों (Scenarios) से समझते हैं:
परिदृश्य 1: कम रिटर्न, लेकिन ज्यादा समय
मान लीजिए आपने ₹10,000 का निवेश किया।
सालाना रिटर्न: 12%
समय अवधि: 10 वर्ष
कुल मैच्योरिटी अमाउंट: ₹31,060
परिदृश्य 2: ज्यादा रिटर्न, लेकिन कम समय
अब मान लीजिए आपने वही ₹10,000 किसी अन्य जगह निवेश किए।
सालाना रिटर्न: 15%
समय अवधि: 8 वर्ष
कुल मैच्योरिटी अमाउंट: ₹30,590
मुख्य निष्कर्ष: रिटर्न से ज्यादा जरूरी है ‘लंबी अवधि’
इन दोनों स्थितियों की तुलना करने पर एक दिलचस्प बात सामने आती है। दूसरे विकल्प में रिटर्न (15%) ज्यादा था, लेकिन समय (8 वर्ष) कम होने के कारण कुल रकम कम बनी। वहीं, पहले विकल्प में रिटर्न (12%) कम था, लेकिन 2 साल ज्यादा समय मिलने की वजह से फंड बड़ा बन गया।
इससे यह साफ निष्कर्ष निकलता है कि निवेश में रिटर्न की दर से ज्यादा महत्वपूर्ण यह है कि आप बाजार में कितनी लंबी अवधि तक बने रहते हैं।
यह रॉकेट साइंस नहीं, ‘कंपाउंडिंग’ की ताकत है
अक्सर लोग सही समय या सबसे ज्यादा रिटर्न देने वाली स्कीम के इंतजार में निवेश टालते रहते हैं। लेकिन वेल्थ क्रिएशन (धन सृजन) का असली नियम यही है कि जितना जल्दी हो सके, निवेश की शुरुआत की जाए। कंपाउंडिंग का जादू तभी काम करता है जब आप अपने पैसे को बढ़ने के लिए पर्याप्त समय देते हैं।
विशेषज्ञ की सलाह: कल या परसों का इंतजार करने के बजाय अपने भविष्य की जरूरतों के लिए आज ही निवेश की शुरुआत करें, ताकि लंबी अवधि में आपके पास एक बड़ा और सुरक्षित फंड उपलब्ध हो सके।
स्रोत / विचार: राजेश के. गौर (संस्थापक, जेनिथ वेल्थ | AMFI रजिस्टर्ड MFD)












