PGI : वन-स्टॉप क्लीनिक से फ्रोजन शोल्डर के मरीजों को मिल रही नई जिंदगी

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बिना MRI और कम स्टेरॉयड से हो रहा सटीक इलाज

​लखनऊ। कंधे के असहनीय दर्द और जकड़न (फ्रोजन शोल्डर) से जूझ रहे मरीजों के लिए संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (SGPGIMS) का एपेक्स ट्रॉमा सेंटर एक नई उम्मीद बनकर उभरा है। संस्थान द्वारा संचालित ‘वन-स्टॉप शोल्डर क्लीनिक’ ने पिछले एक साल में 175 से अधिक मरीजों को इस दर्दनाक समस्या से राहत दिलाई है। आधुनिक अल्ट्रासाउंड-गाइडेड तकनीक, मिनिमली इनवेसिव (कम चीरा वाली) प्रक्रिया और सीमित स्टेरॉयड के उपयोग से यह क्लीनिक मरीजों को सस्ता, सुरक्षित और तेज इलाज मुहैया करा रहा है।

​एक ही छत के नीचे जांच, इलाज और रिहैबिलिटेशन
फ्रोजन शोल्डर, जिसे चिकित्सकीय भाषा में ‘एडहेसिव कैप्सुलाइटिस’ कहा जाता है, मरीज की दिनचर्या को बुरी तरह प्रभावित करता है। कपड़े पहनना, बाल बनाना या हाथ ऊपर उठाना जैसे रोजमर्रा के काम भी बेहद दर्दनाक हो जाते हैं। पारंपरिक चिकित्सा प्रणाली में मरीजों को कई विभागों के चक्कर काटने पड़ते हैं और महंगी जांचों से गुजरना पड़ता है।
​इस समस्या के समाधान के रूप में एपेक्स ट्रॉमा सेंटर में हर मंगलवार को यह विशेष क्लिनिक संचालित किया जाता है।

फिजिकल मेडिसिन एवं रिहैबिलिटेशन (PMR) विभाग के अंतर्गत काम करने वाला यह क्लिनिक एक एकीकृत मॉडल पर आधारित है। यहां मरीज की क्लिनिकल जांच, पॉइंट-ऑफ-केयर अल्ट्रासाउंड (USG) द्वारा सटीक निदान, लक्षित उपचार और फिजियोथेरेपी (रिहैबिलिटेशन) की सुविधा एक ही जगह पर मिल जाती है।

​MRI की जरूरत खत्म, डायबिटीज मरीजों के लिए भी वरदान
इस नई पद्धति की सबसे बड़ी खासियत यह है कि अधिकांश मामलों में मरीजों को महंगे MRI स्कैन की आवश्यकता नहीं पड़ती। अल्ट्रासाउंड के जरिए डॉक्टर सीधे प्रभावित हिस्से को देखकर सटीक इलाज करते हैं, जिससे इलाज का खर्च और समय दोनों बचते हैं।
​इसके अलावा, क्लिनिक में स्टेरॉयड का प्रयोग बेहद नियंत्रित और आवश्यकता पड़ने पर ही किया जाता है। यह दृष्टिकोण विशेष रूप से मधुमेह (डायबिटीज) के मरीजों के लिए अत्यंत सुरक्षित है, क्योंकि अत्यधिक स्टेरॉयड से ब्लड शुगर बढ़ने का खतरा रहता है।

​विशेषज्ञों की राय
​डॉ. सिद्धार्थ राय (अतिरिक्त प्रोफेसर, PMR विभाग): “हमारा लक्ष्य मरीज को भटकने से बचाना है। अल्ट्रासाउंड आधारित सटीक जांच और व्यवस्थित रिहैबिलिटेशन के संयोजन से मरीज कुछ ही हफ्तों में सामान्य जीवन में लौट आते हैं।”
​प्रो. अरुण के. श्रीवास्तव (प्रमुख, एपेक्स ट्रॉमा सेंटर): “इस तरह के एकीकृत क्लिनिक न केवल मरीजों की सुविधा बढ़ाते हैं, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं की दक्षता और इलाज के परिणामों में भी अभूतपूर्व सुधार लाते हैं।”
​प्रो. आर. के. धीमन (निदेशक, SGPGIMS): “रिहैबिलिटेशन मेडिसिन में अल्ट्रासाउंड-गाइडेड तकनीक का उपयोग एक बड़ा कदम है। इससे किफायती और सटीक स्वास्थ्य सेवाएं संभव हो रही हैं।”
​यदि आप या आपका कोई परिचित लगातार कंधे के दर्द या जकड़न से परेशान है, तो समय पर एपेक्स ट्रॉमा सेंटर के शोल्डर क्लिनिक में परामर्श लेकर इस समस्या से स्थायी राहत पा सकते हैं।

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