लखनऊ। किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (KGMU) ने जन्मजात और आनुवंशिक (Genetic) बीमारियों की समय रहते पहचान और रोकथाम के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। सोमवार को यूनिवर्सिटी के पैथोलॉजी विभाग में भारत सरकार के जैव प्रौद्योगिकी विभाग (DBT) के ‘निदान केंद्र’ के साथ-साथ नवीनीकृत स्नातक (UG) व स्नातकोत्तर (PG) प्रयोगशाला का भव्य शुभारंभ किया गया। कुलपति ने फीता काटकर इन तीनों परियोजनाओं की शुरुआत की।
📌 मुख्य बिंदु (Highlights)
मुफ्त इलाज: केंद्र पर होने वाली सभी जटिल और महंगी जांचें पूरी तरह से मुफ्त होंगी।
थैलेसीमिया की पहचान: गर्भावस्था के शुरुआती 3 महीनों में ही पति-पत्नी की जांच कर बच्चे में थैलेसीमिया के खतरे का पता लगाया जाएगा।
न्यूबॉर्न स्क्रीनिंग: जन्म के 3 से 5 दिनों के भीतर नवजात शिशु की एड़ी से खून का सैंपल लेकर 4 गंभीर बीमारियों की जांच होगी।
‘उम्मीद’ योजना के तहत खुला केंद्र, समय पर इलाज है मकसद
डीबीटी निदान परियोजना की प्रमुख डॉ. मिली जैन ने बताया कि इस केंद्र की स्थापना केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी ‘उम्मीद’ (UMMID) योजना के तहत की गई है।
“हमारा मुख्य मकसद गर्भावस्था के दौरान और जन्म के तुरंत बाद बच्चों में होने वाली गंभीर आनुवंशिक व जन्मजात बीमारियों की शुरुआती स्टेज में ही पहचान करना है, ताकि उन्हें समय रहते बचाया जा सके।”
— डॉ. मिली जैन, परियोजना प्रमुख
प्रेग्नेंसी के शुरुआती 3 महीनों में होगी पति-पत्नी की जांच
डॉ. मिली जैन के मुताबिक, थैलेसीमिया जैसी खतरनाक बीमारी से बच्चों को बचाने के लिए गर्भावस्था के शुरुआती तीन महीनों में ही गर्भवती महिला और उसके पति की थैलेसीमिया जांच की जाएगी। अगर रिपोर्ट में कोई जोखिम दिखता है, तो गर्भ में पल रहे शिशु की विशेष जांच कर बीमारी के खतरे का सटीक आकलन किया जाएगा।
नवजातों की एड़ी से लिया जाएगा खून, इन 4 गंभीर बीमारियों की होगी जांच
बच्चे के जन्म के बाद भी यह केंद्र सुरक्षा चक्र प्रदान करेगा। जन्म के तीसरे से पांचवें दिन के भीतर नवजात शिशु की एड़ी (Heel Prick) से खून का एक छोटा सा नमूना लिया जाएगा। इससे बच्चों में होने वाली इन 4 प्रमुख जन्मजात बीमारियों की मुफ्त जांच होगी:
जी-6-पीडी (G6PD) की कमी
जन्मजात हाइपोथायरॉयडिज्म (Congenital Hypothyroidism)
गैलेक्टोसीमिया (Galactosemia)
जन्मजात एड्रिनल हाइपरप्लासिया (Congenital Adrenal Hyperplasia)
पोर्टल कमेंट: KGMU की यह पहल न सिर्फ नवजातों को दिव्यांगता और गंभीर बीमारियों से बचाएगी, बल्कि गरीब परिवारों को महंगे मेडिकल टेस्ट के खर्च से भी बड़ी राहत देगी।












