लोहिया संस्थान का तृतीय दीक्षांत समारोह सम्पन्न, आकांक्षा जैन बनीं चांसलर मेडल विजेता

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राज्यपाल ने संस्थान के छात्रावासों में सप्ताह में दो दिन नॉनवेज परोसे जाने की परंपरा पर सवाल

लखनऊ। Dr. Ram Manohar Lohia Institute of Medical Sciences (लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान) का तृतीय दीक्षांत समारोह पूरे गरिमामय और भव्य माहौल में आयोजित किया गया। गोमती नगर स्थित Indira Gandhi Pratishthan में आयोजित इस समारोह में पासआउट छात्रों और युवा डॉक्टरों को चिकित्सा पेशे की जिम्मेदारियों, सेवा भावना और समाज के प्रति समर्पण का संदेश दिया गया।

इस वर्ष एमबीबीएस छात्रा आकांक्षा जैन ने संस्थान का प्रतिष्ठित चांसलर मेडल जीतकर टॉपर बनने का गौरव हासिल किया, जबकि हरमन सिंह ने डायरेक्टर मेडल प्राप्त कर दूसरा स्थान हासिल किया।

समारोह को ऑनलाइन संबोधित करते हुए राज्यपाल Anandiben Patel ने सभी डिग्रीधारकों को बधाई देते हुए कहा कि “करोड़ों लोगों की स्वास्थ्य संबंधी उम्मीदें अब आप छात्रों से जुड़ी हैं। आपका ज्ञान तभी सार्थक है जब वह समाज की सेवा में समर्पित हो।”

राज्यपाल ने संस्थान के छात्रावासों में सप्ताह में दो दिन नॉनवेज परोसे जाने की परंपरा पर सवाल उठाते हुए कहा कि इसकी आवश्यकता पर पुनर्विचार किया जाना चाहिए। साथ ही छात्रावास परिसर और ग्राउंड में फैली गंदगी पर नाराजगी जताते हुए तत्काल सफाई के निर्देश दिए। उन्होंने अपर मुख्य सचिव अमित कुमार घोष को इस मामले पर विशेष ध्यान देने को कहा।

कार्यक्रम में मौजूद उपमुख्यमंत्री एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री Brajesh Pathak ने छात्रों को आश्वस्त करते हुए कहा कि राज्य सरकार हमेशा उनके साथ खड़ी है और चिकित्सा क्षेत्र को बेहतर बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।

समारोह के मुख्य अतिथि प्रो. (डॉ.) वेदप्रकाश मिश्रा ने अपने संबोधन में कहा कि “मैं भाषण नहीं, सम्भाषण कर रहा हूं। नियति ने आपको जो जिम्मेदारी सौंपी है, उसे ईमानदारी और संवेदनशीलता के साथ निभाना होगा।”

संस्थान के निदेशक प्रो. (डॉ.) सी.एम. सिंह ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि अब उनके सामने सिर्फ किताबें नहीं, बल्कि असली जीवन की वे परिस्थितियां होंगी जहां मरीजों की उम्मीद, चिंता और भरोसा सीधे उनसे जुड़ा होगा।

उन्होंने संस्थान की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए बताया कि वर्तमान में संस्थान में प्रतिवर्ष 200 एमबीबीएस, 40 बीएससी नर्सिंग, 107 एमडी/एमएस, 36 डीएम/एमसीएच, 6 एमएससी (न्यूक्लियर मेडिसिन), 4 डीएनबी, 2 एफएनबी, 76 पैरामेडिकल डिप्लोमा और 35 पीएचडी शोधार्थियों को प्रवेश दिया जा रहा है। संस्थान के 34 विभागों में शैक्षणिक पाठ्यक्रम संचालित हैं।

उन्होंने बताया कि वर्ष 2026-27 में एफएनबी और डीएनबी की 7 नई सीटें बढ़ाने का प्रस्ताव भेजा गया है। वहीं वर्ष 2025-26 में संस्थान के संकाय सदस्यों द्वारा 148 अनुसंधान परियोजनाएं, 20 क्लीनिकल ट्रायल, एमबीबीएस छात्रों की 8 शोध परियोजनाएं, परास्नातक विद्यार्थियों की 90 थीसिस और संस्थान के नाम 3 पेटेंट दर्ज किए गए हैं।

यह दीक्षांत समारोह न सिर्फ छात्रों की उपलब्धियों का उत्सव बना, बल्कि चिकित्सा सेवा को समाज के प्रति जिम्मेदारी और समर्पण के साथ निभाने का महत्वपूर्ण संदेश भी दे गया।

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