लखनऊ। ज्येष्ठ शुक्ल दशमी के दिन ही भागीरथ गंगा को धरती पर लायें थे। इस दिन गंगा धरती पर अवतरण हुई थी जिसे हम गंगा दशहरा के नाम से मनाते है इस वर्ष गंगा दशहरा 25 मई और 26 मई को लेकर असमंजस है । पौराणिक मान्यता के अनुसार जेठ मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि के दिन हस्त नक्षत्र में मां गंगा स्वर्ग से पृथ्वी पर आई थी कशी पंचांग अनुसार दशमी तिथि सोमवार 25 मई को प्रातः 8:01 बजे लग रही, जो मंगलवार 26 मई को प्रातः 07:40 तक रहेगी। उदया तिथि की अनुसार, दशमी 26 मई को मिल रही है। 26 मई के दिन गंगा दशहरा मनाया जाएगा 26 मई हस्त नक्षत्र, सिद्धि योग और चन्द्रमा कन्या राशि, सूर्य वृषभ राशि में होगा अतः इसी दिन गंगा दशहरा मनाना शास्त्र सम्मत है।
द्रिक पंचांग के अनुसार दशमी तिथि 25 मई को प्रात: 04:30 से प्रारंभ होकर 26 मई को प्रात: 05 :10 तक रहेगी । ऐसे में उदया तिथि की अनुसार, 25 मई के दिन गंगा दशहरा मनाया जाएगा।

स्वास्तिक ज्योतिष केन्द्र, अलीगंज के ज्योतिषाचार्य एस.एस.नागपाल ने बताया कि गंगा दशहरा को पूजा करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है इसे ‘‘गंगावतरण’’ भी कहते है गंगा दशहरा को गंगा आदि पवित्र नदियों में स्नान दान पुण्य का विशेष महत्व है। मान्यता है कि भगीरथ के 60 हजार पूवर्जाे को कपिल मुनि का श्राप मिला था जिसकी वजह से राजा भागीरथ ने गंगा को धरती पर लाने के लिए घोर तपस्या की तब प्रसन्न होकर गंगा जी प्रकट हुई। मां गंगा मोक्षदायिनी और समस्त पापों का नाश करने वाली और अक्षय पुण्य फल प्रदान करने वाली है।
इनकी महिमा पुराणों में भी की गई है। तुलसी दास जी ने भी कलयुग में सदगति के लिये श्रीराम और देव नदी गंगा का पवित्र जल को ही आधार माना है। हिन्दु संस्कृति में किसी भी शुभ कार्य/शुद्धि के लिये गंगा जल प्रयोग में लाते है। इस पर्व पर वाराणसी में लाखों लोग गंगा स्नान करके दशवमेघ घाट पर भव्य आरती करते है । अगर गंगा में स्नान न कर सके तो घर में नहाने के पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करें इस दिन 10 अंक का विशेष महत्व है पूजा करते समय सभी सामग्री को 10 की मात्रा में चढ़ाएं। इस दिन दान का भी महत्व है। ऐसा करने वाला महापातकों के बराबर के दस पापों से छूट जाता है।
जैसे 10 फूल 10 दीपक 10 फल आदि । इस दिन कीमती सामान खरीदने नया वाहन खरीदने आदि के लिए समय अनुकूल माना जाता है।











