*सरकार ने पत्तियों के इस्तेमाल पर लगाई रोक*
न्यूज। अश्वगंधा की पत्तियों पर लगा बैन! सेहत बनाने के चक्कर में कहीं आप ‘ज़हर’ तो नहीं खा रहे?
आयुर्वेद का ‘सुपरफूड’ कहा जाने वाला अश्वगंधा इन दिनों विवादों में है। अगर आप भी बाजार से मिलने वाले अश्वगंधा सप्लीमेंट्स के शौकीन हैं, तो यह खबर आपके होश उड़ा सकती है। भारत सरकार (FSSAI और आयुष मंत्रालय) ने बड़ा कदम उठाते हुए अश्वगंधा की पत्तियों (Leaves) के इस्तेमाल पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है।
⚠️ क्यों लिया गया यह कड़ा फैसला?
अक्सर कंपनियां मुनाफा कमाने के लिए जड़ों के बजाय सस्ती पत्तियों का इस्तेमाल करती हैं। सरकार के इस बैन के पीछे 3 मुख्य कारण हैं:
लीवर और नसों को खतरा: रिसर्च के अनुसार, पत्तियों में ‘विथफेरिन-ए’ नामक तत्व की मात्रा बहुत अधिक होती है, जो लीवर के लिए टॉक्सिक (जहरीला) हो सकता है।
वैज्ञानिक प्रमाणों की कमी: प्राचीन आयुर्वेदिक ग्रंथों में केवल जड़ (Root) के सेवन की सलाह दी गई है। पत्तियों के आंतरिक सेवन की सुरक्षा पर कोई ठोस डेटा उपलब्ध नहीं है।
थायराइड का बिगड़ता संतुलन: पत्तियों के अनियंत्रित सेवन से शरीर में थायराइड का लेवल असंतुलित हो सकता है।
💸 मुनाफे का ‘गंदा’ खेल: 100 गुना सस्ती हैं पत्तियां
कंपनियां आखिर पत्तियों का इस्तेमाल क्यों कर रही थीं? इसका जवाब सीधा गणित है। अश्वगंधा की पत्तियां, उसकी जड़ों के मुकाबले 100 गुना सस्ती पड़ती हैं। इसी लागत को कम करने के लिए कई ब्रांड्स ग्राहकों की सेहत से समझौता कर रहे थे।
🔍 अब क्या बदल जाएगा?
सरकार के नए आदेश के बाद अब सप्लीमेंट कंपनियों के लिए ये नियम अनिवार्य होंगे:
प्रोडक्ट में केवल अश्वगंधा की जड़ों का ही इस्तेमाल होगा।
पैकेट पर स्पष्ट रूप से लिखना होगा कि पौधे का कौन सा हिस्सा इस्तेमाल किया गया है।
यूरोपीय देशों (पोलैंड और हंगरी) की तरह अब भारत में भी इसके मानकों पर सख्ती बरती जाएगी।
प्रो टिप: अगली बार जब आप अश्वगंधा खरीदें, तो लेबल को ध्यान से पढ़ें। अगर सामग्री में ‘Leaf Extract’ लिखा है, तो समझ लीजिए कि वह फायदे से ज्यादा नुकसान पहुंचा सकता है।
सावधान रहें, सुरक्षित रहें! आयुर्वेद का लाभ तभी है जब उसे सही तरीके और सही जानकारी के साथ अपनाया जाए।
क्या आप वर्तमान में अश्वगंधा का सेवन किसी विशेष स्वास्थ्य लक्ष्य (जैसे नींद या तनाव) के लिए कर रहे हैं?











