PGI ने अत्याधुनिक कॉक्लियर इम्प्लांट के जरिए सुनने की क्षमता को किया बहाल

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लखनऊ संजय गांधी पी जी आई की एक टीम ने एक ऐसे युवक पर सफलता पूर्वक अत्याधुनिक कॉक्लियर इम्प्लांट किया है, जिसने एक भीषण सड़क दुर्घटना में अपनी श्रवण शक्ति पूरी तरह खो दी थी। 23 वर्षीय युवक को चोट के बाद दोनों कानों मे गंभीर श्रवण हानि हुई थी, जिसमें उसका बायां भीतरी कान पूरी तरह से नष्ट हो गया था और दायां कान फ्रैक्चर हो गया था।

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केवल एक कान को ही बचाया जा सकता था, इसलिए न्यूरोटोलॉजी टीम के सामने यह निर्धारित करना एक महत्वपूर्ण चुनौती थी कि क्या मरीज की दाएं कान की श्रवण तंत्रिका इम्प्लांट का काम करने के लिए पर्याप्त रूप से अक्षतिग्रस्त व अखंड है।
चंडीगढ़ के पीजीआईएमईआर के प्रो रमनदीप के विशेषज्ञ परामर्श से यह महत्वपूर्ण सफलता मिली, जिन्होंने दाहिने कान की स्थिति की पुष्टि करने के लिए एक विशेष नैदानिक ​​परीक्षण किया। पीजीआई की न्यूरोऑटोलॉजी टीम ने डॉ. एम. रवि शंकर के नेतृत्व में, जनवरी माह के दूसरे सप्ताह में जटिल कॉक्लियर इम्प्लांट प्रक्रिया को अंजाम दिया। सर्जरी में अत्याधुनिक तकनीक के इम्प्लांट प्रोसेसर का उपयोग किया गया, जो लगभग सामान्य वाक् कोडिंग प्रदान करने में सक्षम है, जिससे रोगी को स्पष्ट रूप से बात को समझने का सर्वोत्तम संभव अवसर मिलता है।

इस तकनीक का प्रयोग उत्तर प्रदेश में पहली बार किया गया था। डिवाइस को आज सफलता पूर्वक सक्रिय कर दिया गया। रोगी ने ध्वनि के प्रति तत्काल सकारात्मक प्रतिक्रिया दिखाई, जो उसकी श्रवण शक्ति में वापसी की दिशा में एक विजयी मील का पत्थर है। पीजीआईएमईआर, चंडीगढ की श्रीमती पारुल और एस जी पी जी आई, लखनऊ की अपनी समर्पित ऑडियोलॉजी टीम, जिसमें सुश्री आद्या, कीर्ति और मंगल शामिल थे, द्वारा इस प्रक्रिया को कुशलतापूर्वक संपन्न किया गया। इस प्रक्रिया में विशेष ऑडियोलॉजी विशेषज्ञों, माथुर और सुश्री शिवांगी का भी सहयोग रहा।

एक वरिष्ठ टीम सदस्य ने बताया, “यह मामला दुर्घटना की वजह से बदली शारीरिक संरचना के कारण असाधारण रूप से जटिल था। चंडीगढ़ में हमारे सहयोगियों के साथ तंत्रिका कार्यप्रणाली की पुष्टि करने से लेकर नवीनतम इम्प्लांट तकनीक को लागू करने तक की संपूर्ण प्रक्रिया एक सुनियोजित प्रयास था। यह सफल प्रक्रिया न्यूरोटोलॉजी के टीम वर्क और तकनीकी प्रगति का प्रमाण है। कॉक्लियर इम्प्लांट इलेक्ट्रॉनिक उपकरण होते हैं, जो आंतरिक कान के क्षतिग्रस्त हिस्सों को बाईपास करके सीधे श्रवण तंत्रिका को उत्तेजित करते हैं।
अब यह युवक गहन श्रवण पुनर्वास शुरू करने के लिए तैयार है, जहां वह अपने इम्प्लांट से आने वाले नए संकेतों को सार्थक ध्वनि के रूप में समझना सीखेगा।

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