पांच वर्ष से छोटे बच्चों में गंभीर निमोनिया 24 प्रतिशत : डा. राजेन्द्र प्रसाद
लखनऊ। पांच वर्ष से छोटे बच्चों को निमोनिया से बचाव करना आवश्यक होता है। इन्हें निमोनिया जरा सी चूक से आसानी से घेर लेता है। संक्रमण के कारण बच्चे आसानी से निमोनिया की गिरफ्त में आ सकते हैं। बच्चों को डाईट, शुद्ध वातावरण, टीकाकरण और समय पर सही इलाज से बच्चों को निमोनिया से बचाया जा सकता हैं। देखा गया है कि कुपोषित बच्चे बहुत जल्दी निमोनिया की चपेट में आ जाते हैं। यह जानकारी किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय में पल्मोनरी मेडिसिन एंड क्रिटिकल केयर विभाग प्रमुख डॉ. वेद प्रकाश ने दी विश्व निमोनिया दिवस पर विभाग में जागरुकता कार्यक्रम में दी।
डॉ. वेद प्रकाश ने बताया कि निमोनिया गंभीर संक्रमण है। इसमें बच्चे को सर्दी-जुकाम के साथ बुखार भी होता है। इसके साथ ही सांस फूलने लगती है अौर उल्टियां होने लगती हैं। समय पर सही इलाज से बीमारी नियंत्रण में आ सकती है। उन्होंने बताया कि लक्षण दिखने में तत्काल इलाज होना चाहिए, इलाज में देरी घातक हो सकती है। उन्होंने बताया कि गंभीर मरीजों को डाक्टर के परामर्श पर एंटीबायोटिक्स और ऑक्सीजन देने की आवश्यकता पड़ सकती है।
केजीएमयू रेस्पीरेटरी मेडिसिन विभाग के पूर्व प्रमुख डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने कहा कि उत्तर प्रदेश में भारत के पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों का लगभग 18 प्रतिशत मिलता है। वहीं गंभीर निमोनिया के लगभग 24 प्रतिशत केस देखे गये है।
उन्होंने बताया कि पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों में निमोनिया के कारण होने वाली मौत का लगभग 26 प्रतिशत योगदान है। उन्होंने बताया कि हॉस्पिटल मैनेजमेंट इनफॉरमेशन सिस्टम के वर्ष 2022-23 के आंकड़ों के अनुसार उत्तर प्रदेश में निमोनिया के कारण 452 मौत हो चुकी है।
निमोनिया के लक्षण– सर्दी-जुकाम- खांसी – बुखार – सांस लेने में परेशानी – छाती में दर्द
निमोनिया से बचाव- समय पर टीकाकरण करवाएं- साफ- सफाई का ध्यान रखें- पौष्टिक आहार लें- धूम्रपान से बचना चाहिए।












