लखनऊ। मरीजों को सस्ती दवा देने वाला एचआरएफ काउंटर लिंब सेंटर में नहीं शुरू हो पाया है। इस कारण मरीजों को महंगी दवा बाहर से खरीदनी पड़ रही है। जब कि लिंब सेंटर आर्थोपैडिक विभाग के अलावा कृत्रिम अंग एवं अवयव केन्द्र भी है। इन दोनों में विभाग में सर्जरी लगातार होती है आैर उसमें प्रयोग होने वाला सामान व दवा दोनों महंगे आते है।
लिंब सेंटर की के दोनों विभाग के मरीज काफी संख्या में भर्ती होते है। कृत्रिम अंग एवं अवयव केंद्र की ओपीडी भी इसी बिल्डिंग में संचालित होती है आैर कृत्रिम भी इसी सेंटर में बनते है। ऐसे में काफी संख्या में मरीज यहां पर आते है।
यहां पर मरीजों को दवा देने के लिए सामान्य दवा काउंटर तो खुला हुआ है, लेकिन वहां पर सभी दवा व सर्जरी में प्रयोग होने वाला सामान नहीं मिल पाता है। हड्डी की सर्जरी में प्रयोग होने वाला सामान व दवा तीमारदार को बाहर के मेडिकल स्टोर से ही लाना पड़ता है। इन मेडिकल स्टोरों पर मरीज को अलग- अलग छूट दी जा रही है। कोई दस प्रतिशत तो कोई बीस प्रतिशत दवा व सामान में छूट देने का दावा करता है। फिर भी मरीज को दवा एचआरएफ काउंटण से महंगी ही पड़ती है। एचआरएफ काउंटर पर मरीजों को कम्पनी रेट पर दवा उपलब्ध करायी जा रही है।
Iबताया जाता है कि कोरोना काल के बाद आर्थोपैडिक विभाग व कृत्रिम अंग एवं अवयव सेंटर वापस लिंब सेंटर में आने पर एचआरएफ दवा काउंटर शुरू करने का प्रस्ताव केजीएमयू प्रशासन को भेजा गया था। जो कि अभी तक ठंडे बस्ते में है।