लखनऊ। उत्तर प्रदेश फार्मेसी काउंसिल में पिछले पांच महीने से अंशकालिक रजिस्ट्रार की नियुक्ति लटकी हुई है। अंशकालिक रजिस्ट्रार की नियुक्ति के लिए शासन को नियमानुसार अंशकालिक रजिस्ट्रार तैनाती के लिए नाम भेज दिया गया था, लेकिन अभी तक कोई जवाब न मिलने से फार्मासिस्टों में आक्रोश व्याप्त है।
उत्तर प्रदेश फार्मेसी काउंसिल की विशेष बैठक नवम्बर महीने में काउंसिल सभागार में आयोजित की गयी थी। यह बैठक महानिदेशक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं के संरक्षण तथा अध्यक्ष संदीप बडोला की अध्यक्षता में आहूत की गयी थी। बैठक में मौजूद सभी 15 सदस्यों के बहुत के आधार पर निर्णय लिया गया कि इटौंजा के मेहगंवा पीएचसी के अखिल सिंह को अंशकालिक रजिस्ट्रार के पद पर नियुक्त किया जाना था। यह नियुक्ति फार्मेसी एक्ट 1948 की धारा 26(ए) में निहित प्राविधानों के अनुसार शासन से पूर्वानुमोदन के बाद होनी थी। शासन को अनुमोदन के लिए प्रस्ताव प्रेषित किया गया।
बताया जाता है कि अंशकालिक रजिस्ट्रार की नियुक्ति का प्रस्ताव शासन में पहुंचने के बाद पांच महीने बीतने के बाद भी अभी तक कोई निर्णय नहीं लिया गया है। अंशकालिक रजिस्ट्रार पर सहमति के बाद नियुक्ति का इंतजार कर रहे फार्मासिस्ट अखिल सिंह बताते है कि पांच महीने बीतने के बाद अभी तक कोई न तो कोई जवाब दिया जा रहा है.
आैर कोई कार्रवाई की जा रही है। उनका कहना है कि कोई भी जिम्मेदार अधिकारी कुछ बोलने को तैंयार नहीं है। उनका कहना है कि बस बताया जाता है कि कार्रवाई चल रही है। उनका कहना है कि पांच महीने बीतने के बाद कोई जबाव बन मिलने पर वह न्याय के लिए न्यायालय की शरण में चले गये है।