लखनऊ। किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय प्रशासन अपने डाक्टरों से निजी प्रैक्टिस न करने संबंधी शपथ पत्र लेना मुश्किल होता जा रहा है। डाक्टरों के विरोध के बाद शपथ पत्र में संशोधन के बाद अब तीसरी बार नोटिस जारी करके शपथ पत्र जमा करने को कहा गया है।
केजीएमयू के एक डॉक्टर के निजी अस्पताल संचालन करने की शिकायत पर हाईकोर्ट की टिप्पणी के बाद शासन ने केजीएमयू से डाक्टरों की निजी प्रैक्टिस पर जवाब मांगा है। इस पर केजीएमयू प्रशासन ने डाक्टरों से निजी प्रैक्टिस न करने तथा किसी ट्रस्ट या संस्था का सदस्य या पदाधिकारी न बनने के बारे में शपथ पत्र देने का निर्देश दिया था।
डाक्टरों ने शपथ पत्र में दिये गये कई बिंदुओं का विरोध शुरू कर दिया था। इस कारण कुछ समय के लिए शपथ पत्र देने प्रक्रिया थम गयी थी। शपथ पत्र के प्रारूप को लेकर विधिक राय भी ली गयी। इसके बाद अब जाकर शपथ पत्र का प्रारूप तय हुआ है। कुलसचिव रेखा एस चौहान ने डाक्टरों को एक बार फिर से शपथ पत्र देने संबंधी पत्र जारी किया गया है। इस नये प्रारूप में केजीएमयू के डॉक्टरों के निजी प्रैक्टिस पर विवि अधिनियम और परिनियम में मनाही है।
ऐसा मिलने पर उनकी सेवा तक समाप्त करने तक का प्रावधान रखा गया है। इन नियम के अनुसार अगर किसी डाक्टर पर निजी प्रैक्टिस करने का मामला साबित होता है, तो फिर उसकी सेवा समाप्त की जा सकती है। डाक्टरों को प्रैक्टिस न करने के लिए नॉन प्रैक्टिसिंग भत्ता भी दिया जाता है। इसके बावजूद कई शिक्षकों के खिलाफ निजी प्रैक्टिस करने की शिकायत लगातार आती रहती है।











