म्यूकरमाइकोसिस से संदिग्ध मौत

0
800

 

Advertisement

 

 

लखनऊ।  ब्लैक फंगस यानी कि म्यूकरमाइकोसिस से पीड़ित महिला मरीज की संदिग्ध मौत इलाज दौरान डॉ राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान में हो गयी। प्रदेश में ब्लैक फंगस संक्रमित पहली मरीज की मौत बताई जा रही है। हालांकि इस बात पर संस्थान के डॉक्टरों ने कुछ भी बोलने से इंकार कर दिया है।
बताया जाता है कि सोमवार को आंख व नाक के पास सूजन के बाद महिला लोहिया संस्थान की इमरजेंसी में भर्ती हुई थी। यहां डॉक्टरों की टीम ने महिला मरीज की जांच में लक्षणों के आधार पर ब्लैक फंगस की आशंका जाहिर कर दी। तत्काल महिला मरीज की सीटी स्कैन जांच करायी गयी। जहां सीटी स्कैन की जांच रिपोर्ट में फंगस होने की संभावना पूरी तरह दिखने लगी। महिला मरीज का डॉक्टरों ने इलाज शुरू कर दिया। इलाज के बावजूद महिला की हालत में सुधार नहीं दिखा, तो महिला मरीज का फंगस की कल्चर जांच कराने का निर्णय लिया गया। बताया जाता है कि जांच रिपोर्ट आने से पहले ही बुधवार को महिला मरीज की मौत हो गयी। लोहिया संस्थान में 4 से 5 मरीज इस बीमारी से पीड़ित होकर भर्ती है, जिनमें एक मरीज की मौत हो चुकी है। इस संबंध में लोहिया संस्थान के सभी जिम्मेदार अधिकारी मौन साधे हुए हैं।

विशेषज्ञ डॉक्टरों की माने तो पहले ब्लैक फंगस से पीड़ित एक या दो मरीज बड़ी मुश्किल से सामने आते थे। खासकर यह बीमारी डायबिटीज व दूसरी गंभीर बीमारी से पीड़ितों में पायी जाती थी। कोरोना संक्रमण के बाद में यह फंगस काफी देखने को मिल रहा है। डॉक्टरों का कहना है कि इलाज के दौरान लंबे समय तक ऑक्सीजन लगने वाले मरीजों में यह समस्या अधिक दिख रही है। इलाज के दौरान स्टराइड दवा की अधिक डोज लेने वालों में भी फंगस आसानी से पाया जा रहा है। देखा गया है कि कोरोना के ठीक होने के 14 से 15 दिन बाद यह परेशानी सामने आती है।
ये मरीज रहे सावधान
-डायबिटीज मरीज
-एचआईवी, कैंसर, अस्थमा
-कोरोना बीमारी के दौरान जिन मरीजों में ऑक्सीजन का प्रयोग किया गया।

Previous articleअब ग्रामीण क्षेत्रों के सीएचसी अस्पतालों में एल वन प्लस की सुविधा
Next articleनेशनल होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर्स की टीम ने 250 लोगों किया रोग प्रतिरोधक दवा का वितरण

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here