लखनऊ। कोरोना संक्रमित मरीजों में पेट की दिक्कत भी एक लक्षण हो सकता है, इसलिए परामर्श दे रहे डाक्टरों को चाहिये, जांच के दौरान जब मरीज की केस हिस्ट्री बना रहे हो तो पेट जुड़ी दिक्कत को नजर अंदान नहीं करे। यह कोरोना संक्रमण का लक्षण हो सकता है। यह नयी जानकारी संजय गांधी पीजीआई में कोरोना संक्रमण पर किये गये शोध में मिली है। शोध में डाक्टरों ने आश्चर्यजनक तथ्य देंखे कि सिम्प्टोमैटिक मरीज़ों में से एक चौथाई मरीजों में सिर्फ पेट से जुड़ी दिक्कत बनी हुई थी। पीजीआई के विशेषज्ञ डाक्टरों की उपलब्धि जल्द ही में अमेरिकन कॉलेज ऑफ गैस्ट्रोएंटरोलॉजी के प्रतिष्ठित जर्नल क्लीनिकल एंड ट्रांसलेशनल गैस्ट्रोएंटरोलॉजी में प्रकाशित की गयी है । यह शोध को संस्थान के निदेशक प्रो आरके धीमन के नेतृत्व में गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग के डॉ. उदय घोषाल, माइक्रोबायोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. उज्ज्वला घोषाल, गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग के डॉ. आकाश माथुर एवं उनकी टीम द्वारा किया गया है।
इस बारे में रिसर्च में शामिल डाक्टरों का कहना है कि ने अप्रैल से मई माह तक कोरोना जाँच कराने वाले करीब 16 हज़ार मरीज़ों को इस शोध में शामिल किया गया, जिसमें से 252 मरीज़ों की जाँच पॉजिटिव पाई गई। इन 252 में से 208 (82.5) मरीज़ पूरी तरह लक्षण रहित (असिम्प्टोमैटिक) थे , इसके अलावा 44 मरीज़ों में पेट की समस्या से जुड़े या अन्य लक्षण मिले। इनमें से 40 मरीज़ों में सिर्फ अन्य (साँस में तकलीफ, बुखार, जुकाम, खाँसी, गला खराब, कमज़ोरी आदि), 35 में अन्य एवं पेट संबंधित शिकायत दोनों तथा 25 मरीज़ों में सिर्फ पेट से संबंधित लक्षण पाए गए।
शोध में पाया गया कि पांच से भी कम मरीज़ों में गम्भीर बीमारी हुई एवं लगभग दो मरीज़ों की मौत तक हुई। एक और महत्वपूर्ण बाते इस शोध में उभर कर आया वह यह था कि जिन मरीज़ों में पेट से जुड़ी समस्या थी। वह ज़्यादा गंभीर बीमारी से पीड़ित हुए उनमें मृत्यु दर भी अधिक पायी गयी।
शोध कर रहे हाक्टरों का मानना है कि इस शोध की जानकारी सिर्फ मरीज़ों ही नहीं, बल्कि डाक्टरों के लिए भी ज़रूरी है जो काफी संख्या में मरीज़ की जांच कर परामर्श देते है। ऐसे में इस तथ्य की जानकारी होना ज़रूरी है कि सिर्फ पेट संबंधित लक्षण के साथ भी कोरोना के मरीज़ आ सकते हैं। शोधकर्ताओं द्वारा संक्रामक बीमारियों के आम होने के कारण भारतीयों में बेहतर रोग प्रतिरोधक क्षमता (टी सेल रिस्पांस), आँतो में अच्छे सूक्ष्म जीवों का बाहुल्य (बेहतर गट माइक्रोबायोटा) तथा संभवतः कोरोना वायरस के कम आक्रामक प्रकार (जीनोटाइप) का होना पाया गया।