लखनऊ। प्रदेश में लगभग दो लाख की आबादी की याददाश्त कमजोर होती जा रही है। इनमें ज्यादातर 90 प्रतिशत लोग 60 वर्ष के अधिक उम्र के है। आकंड़ों के अनुसार शेष 10 प्रतिशत आबादी 50 वर्ष के आस- पास के लोग है। याददाश्त कमजोर होने के कारण दिनचर्या की आवश्यक बातों को याद ही नहीं रख पाते है। यह अल्जाइमर बीमारी कहलाती है। यह जानकारी किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के वृद्धावस्था मानसिक रोग स्वास्थ्य विभाग के पूर्व विभाग प्रमुख डॉ. एससी तिवारी ने यह जानकारी दी।
शुक्रवार को विश्व अल्जाइमर डे सभी जगह मनाया जाएगा। डॉ. एससी तिवारी ने बताया कि अल्जाइमर को भूलने की बीमारी के रूप में जाना जाता है। ज्यादातर यह बीमारी बुजुर्गों में अधिक देखने को मिलती है। डा. तिवारी ने बताया कि 3.6 फीसदी लोग इसकी की चपेट में हैं। इनमें 1.3 प्रतिशत आबादी अल्जाइमर की चपेट में हैं।
गोमती नगर के डा. राम मनोहर लोहिया अस्पताल के मानसिक रोग विशेषज्ञ डॉ. देवाशीष शुक्ला ने बताया कि अल्जाइमर में मष्तिक के न्यूरांस में दिक्कतें आनी लगती है। प्रोटीन की संरचना भी गड़बड़ाने लगती है। उन्होंने बताया कि अगर समय पर इलाज नहीं किया जाए तो मरीज की हालत खराब होने लगती है। अल्जाइमर की परेशानी बढ़ने लगती है। शुरुआत में बीमारी का इलाज आसानी से हो जाता है, लेकिन देर होने पर मरीज को दिक्कत होने लगती है।
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